
लेखक
Chanchal Chauhan
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चंचल चौहान
उ.प्र. के एक गांव में जन्म, दिल्ली यूनिवर्सिटी से अंग्रेज़ी व हिंदी में एम. ए.। अंग्रेज़ी नाटककार आर्नल्ड वेस्कर पर पी-एच.डी.। दिल्ली वि.वि. के एक कालेज में अंग्रेज़ी का अध्यापन, अब सेवानिवृत्त । कविता व आलोचना की कई किताबें । 1972 में पहला कविता संग्रह, 'प्रहार स्याह रात पर' (राजकुमार सैनी के साथ), 1976 में 'मुक्तिबोध : प्रतिबद्ध कला के प्रतीक' आलोचना पुस्तक। 1979 में 'जनवादी समीक्षा', 1982 में दूसरा कवितासंग्रह, 'खोलो बंद झरोखे'; 2008 में 'आलोचना की शुरुआत' आयी; 2010 में पूर्वप्रकाशित 'जनवादी समीक्षा'; नये शीर्षक, 'आलोचना यात्रा' के रूप में प्रकाशित, 2011 में 'हिंदी कथा साहित्य : विचार और विमर्श' प्रकाशित, मुक्तिबोध काव्य पर 1976 में प्रकाशित पुस्तक, नये रूप में 'मुक्तिबोध के प्रतीक और बिंब' शीर्षक से प्रकाशित। जनवादी लेखक संघ केंद्र की पत्रिका, 'नया पथ' से संबद्ध । एंजेल फ्लोरेस के संपादन में रूसी आलोचना लेखों का अनुवाद, 'मार्क्सवाद और साहित्य' के रूप में। 'प्रालोचन' हिंदी पत्रिका का संपादन, हिंदी पत्रिका, 'उत्तरगाथा' और अंग्रेज़ी पत्रिका, Journal of Arts & Ideas के संपादन से जुड़े रहे। 'साहित्य का दलित सौंदर्यशास्त्र' राधाकृष्ण प्रकाशन से 2024 में प्रकाशित ।
उ.प्र. के एक गांव में जन्म, दिल्ली यूनिवर्सिटी से अंग्रेज़ी व हिंदी में एम. ए.। अंग्रेज़ी नाटककार आर्नल्ड वेस्कर पर पी-एच.डी.। दिल्ली वि.वि. के एक कालेज में अंग्रेज़ी का अध्यापन, अब सेवानिवृत्त । कविता व आलोचना की कई किताबें । 1972 में पहला कविता संग्रह, 'प्रहार स्याह रात पर' (राजकुमार सैनी के साथ), 1976 में 'मुक्तिबोध : प्रतिबद्ध कला के प्रतीक' आलोचना पुस्तक। 1979 में 'जनवादी समीक्षा', 1982 में दूसरा कवितासंग्रह, 'खोलो बंद झरोखे'; 2008 में 'आलोचना की शुरुआत' आयी; 2010 में पूर्वप्रकाशित 'जनवादी समीक्षा'; नये शीर्षक, 'आलोचना यात्रा' के रूप में प्रकाशित, 2011 में 'हिंदी कथा साहित्य : विचार और विमर्श' प्रकाशित, मुक्तिबोध काव्य पर 1976 में प्रकाशित पुस्तक, नये रूप में 'मुक्तिबोध के प्रतीक और बिंब' शीर्षक से प्रकाशित। जनवादी लेखक संघ केंद्र की पत्रिका, 'नया पथ' से संबद्ध । एंजेल फ्लोरेस के संपादन में रूसी आलोचना लेखों का अनुवाद, 'मार्क्सवाद और साहित्य' के रूप में। 'प्रालोचन' हिंदी पत्रिका का संपादन, हिंदी पत्रिका, 'उत्तरगाथा' और अंग्रेज़ी पत्रिका, Journal of Arts & Ideas के संपादन से जुड़े रहे। 'साहित्य का दलित सौंदर्यशास्त्र' राधाकृष्ण प्रकाशन से 2024 में प्रकाशित ।
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