सीधे सामग्री पर जाएँ

हर ₹100 की खरीदारी पर 2 अंक पाएँ, 1 अंक = ₹1और जानें

Dinesh Choudhary
लेखक

Dinesh Choudhary

  • 1किताबें
  • 0फ़ॉलोअर
  • 410बार देखा गया
किताबें देखें शेयर करें
प्रारम्भिक शिक्षा गाँव खेरली से । पिता: दरियाब सिंह चौधरी और माता : वतन देवी। सूचना प्रौद्योगिकी में बी. ई. तक की शिक्षा प्राप्त । हिन्दी और इतिहास विषय में यूजीसी द्वारा आयोजित नेट परीक्षा में जे. आर.एफ होने बाद राजस्थान पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर चयनित लेकिन वहाँ मन न रमने की वजह से इस्तीफा। फिलहाल राजस्थान में सहकारिता विभाग ( आर. ए. एस. एलाइड ) में कार्यरत। मो. : 9694925605
दिनेश चौधरी ई-मेल : dinesh7bhatara@gmail.com
दिनेश चौधरी की किताब - 'लौट कर आता है ज़माना' एक ही साथ फुटकर नोट्स भी है, सम्पादकीय पन्नों के लिए लिखा जाने वाला लेख-आलेख या शायद डायरी भी है ।
किताब का कैनवास इतना बड़ा है कि जहाँ इसमें एक तरफ़ क्लासिक फ़िल्म और उनके गीतों का ज़िक्र है तो दूसरी तरफ़ पहली महिला संगीतकार - सरस्वती देवी, भगवान दादा, सोहराब मोदी, नसीम बानो जैसे भुला दिए कलाकारों के साथ-साथ, सीक्रेट गेम्स का ज़िक्र भी आता है....! यह किताब छोटे-छोटे लेखों एक ऐसा कलेक्शन है जिसे पढ़ने के बाद लगता है कि काश ! इसे थोड़ा और विस्तार में बताया जाता। हालाँकि यही इसकी खासियत बन जाती है कि आप पढ़ने के बाद बहुत कुछ जानने और समझने के इच्छुक हो जाते हैं ।
‘लौट के आता है ज़माना' गीतों और उसके आशय पर बात करती है, खासकर कुछ शब्दों का अलग अलग गीतों में प्रयोग, और गीत किस कंटेक्स्ट में लिखे गए हैं को अच्छे से समझाती है...! इसके साथ ही हर पन्ने पर ऐसे तथ्य हमारे सामने रखती है, जिन्हें जानकर कई बार हम चौंक जाते हैं।
यहाँ पुराने गीतों, गीतकारों, कुछ ख़ास शब्द और उनके गीतों में प्रयोग का ज़िक्र यूँ हुआ है, जैसे हम किसी अच्छे खाने में शामिल धनिए की चटनी या आम के अचार का ज़िक्र करते हैं ।
किताब में लेखक का गीत-संगीत और सिनेमा प्रेम तो दिखता है ही, जब वे परदे के पीछे घटित चीज़ों का ज़िक्र करते हैं तब समझ आता है कि रचना के पीछे का 'बैकग्राउंड' भी कितनी ज़रूरी और दिलचस्प चीज़ है ।
ये सब पढ़ते हुए मैं तो इतने सारे भूले-बिसरे क्लासिकल गीतों से गुज़रा हूँ कि अभी अभी मैंने अपने ‘आइ-ट्यून’ की नई प्ले-लिस्ट बना ली है क्योंकि ये वो गीत हैं- जिन्हें शायद ही कोई एफएम चैनेल, यूट्यूब या म्यूज़िक स्टेशन चलाता हो । मैं चाहता हूं कि युवा पीढ़ी इस किताब को चाव से पढ़ें और हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्मो के बारे में जानें- समझें ।

Dinesh Choudhary की किताबें

₹140 से शुरू, हर किताब पर 20% छूट

किताब नहीं मिल रही?

किताब और लेखक का नाम बताइए, हम बताएँगे कि क्या हम उसे आपके लिए मँगवा सकते हैं।

हमारा पूरा सूची-पत्र

हमारी सभी किताबें एक सूची में। पुस्तकालयों, स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं के लिए उपयोगी।

हमसे बात करें