Editor: Ganga Sahay Meena
About Editor: Ganga Sahay Meena
गंगा सहाय मीणा एक जाने-माने शिक्षाविद, मोटिवेशनल वक्ता और आदिवासी साहित्य पत्रिका के संस्थापक संपादक हैं। उनकी 6 पुस्तकें और सैंकडों आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने 100 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में मुख्य वक्ता के रूप में हिस्सा लिया है। वे विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित अपने संपादकीय लेखों और विभिन्न समाचार चैनलों पर समाचार बहसों में अपनी भागीदारी के लिए भी जाने जाते हैं।
गंगा सहाय मीणा का जन्म राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के सेवा गाँव में हुआ था। उन्होंने स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से स्नातकोत्तर, एम.फिल. और पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
दिल्ली विश्वविद्यालय और पांडिचेरी विश्वविद्यालय में अध्यापन के बाद, गंगा सहाय मीणा अप्रैल 2007 से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अध्यापनरत हैं। वे वर्तमान में जेएनयू स्थित भारतीय भाषा केंद्र में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वे भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन संस्थान की बोर्ड ऑफ स्टडीज के अलावा जेएनयू अकादमिक परिषद और जेएनयू कोर्ट के सदस्य रह चुके हैं। वे अंकारा विश्वविद्यालय, अंकारा (तुर्की) में 2018-19 में विजिटिंग प्रोफेसर और ट्यूरिन विश्वविद्यालय (इटली) में तीन बार (2021, 2023 और 2025 में) विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वे भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित और संचालित Swayam प्लेटफॉर्म के लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम 'हिंदी भाषा का उद्भव और विकास' कोर्स के निर्माता और संयोजक हैं।
प्रकाशित पुस्तकें
आदिवासी साहित्य विमर्श (सं.)
आदिवासी चिंतन की भूमिका
आदिवासी और हिंदी उपन्यास
बालकृष्ण भट्ट: रचना संचयन
भाई तू लाहौर देखने आना (अनु.)
अनुवाद का समाजशास्त्र (अनु.)
गंगा सहाय मीणा को दलित आदिवासी संवाद लेखन पुरस्कार 2011, रुक्मणी देवी युवा पुरस्कार 2017 और भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही वे राजस्थान साहित्य अकादमी के सदस्य रह चुके हैं।
गंगा सहाय मीणा द्वारा लिखित पुस्तक 'आदिवासी चिंतन की भूमिका' हिन्दी में आदिवासी प्रश्न पर लिखी मौलिक व महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में विशिष्ट स्थान रखती है। इसमें 'आदिवासी' पद के अर्थ और संदर्भों से लेकर आदिवासी समाज की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा के साथ आदिवासी साहित्य की अवधारणा और विधावार प्रवृत्तियों को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक के अंत में आदिवासी साहित्य संबंधी पुस्तकों की सूची भी दी गई है। आदिवासी जीवन, भाषा और साहित्य के इतने तत्वों को एक साथ समेटने के कारण यह किताब अपने प्रकाशन (2016) से ही आम पाठकों से लेकर आदिवासियों पर अध्ययन करने वाले अध्येताओं के बीच लोकप्रिय बनी हुई है।
Dr. Ganga Sahay Meena (Associate Professor)
Center of Indian Languages , Jawaharlal Nehru University
New Delhi-67 ,INDIA
Former Visiting Professor
University of Turin (ITALY)
Former Visiting Professor
Ankara University, Ankara (TURKEY)