
लेखक
Keshav Jha
- 1किताबें
- 3फ़ॉलोअर
- 2,511बार देखा गया
केशव आशिष झा का जन्म 26 अप्रैल 2005 को भिवंडी, महाराष्ट्र में हुआ। मूल रूप से वे बुढ़ेब, इनायतपुर, जिला दरभंगा (बिहार) से संबंध रखते हैं, जबकि उनका पालन–पोषण मुंबई के बहुसांस्कृतिक परिवेश में हुआ है।
प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने हिंदी विद्यालय से प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ (BMS) की डिग्री हासिल की और वर्तमान में हिंदी विषय में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की पढ़ाई कर रहे हैं। बचपन से ही हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति उनका विशेष लगाव रहा है, जिसने उन्हें शब्दों के माध्यम से अपने अनुभवों और विचारों को अभिव्यक्त करने की प्रेरणा दी।
उनकी मातृभाषा मैथिली है, जिसके कारण उन्हें मैथिली और भोजपुरी भाषाओं का भी स्वाभाविक ज्ञान है। साथ ही, महाराष्ट्र में पले–बढ़े होने के कारण उन्हें मराठी भाषा की भी अच्छी समझ है। विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के इस संगम ने उनके विचारों को व्यापक दृष्टि और उनकी अभिव्यक्ति को एक विशिष्ट संवेदनशीलता प्रदान की है।
उनका प्रथम कविता–संग्रह “ए मूर्ख, अपनी छवि सुधार” जीवन के उन विविध भावों और संबंधों का सजीव चित्रण है, जिनसे मनुष्य अनायास ही जुड़ा रहता है। इस संग्रह में प्रेम, विरह, संघर्ष, चुनौतियाँ, परिश्रम और जिम्मेदारियों जैसे जीवन के अनेक आयामों को आत्मचिंतन और संवेदनशील दृष्टि के साथ प्रस्तुत किया गया है।
केशव आशिष झा की कविताएँ केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को समझने, स्वयं को पहचानने और समाज के साथ अपने संबंधों पर विचार करने का एक सशक्त प्रयास हैं। उनकी लेखनी युवा संवेदनाओं, जीवनानुभवों और मानवीय रिश्तों की सूक्ष्मता को सहज और प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुँचाती है।
प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने हिंदी विद्यालय से प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ (BMS) की डिग्री हासिल की और वर्तमान में हिंदी विषय में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की पढ़ाई कर रहे हैं। बचपन से ही हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति उनका विशेष लगाव रहा है, जिसने उन्हें शब्दों के माध्यम से अपने अनुभवों और विचारों को अभिव्यक्त करने की प्रेरणा दी।
उनकी मातृभाषा मैथिली है, जिसके कारण उन्हें मैथिली और भोजपुरी भाषाओं का भी स्वाभाविक ज्ञान है। साथ ही, महाराष्ट्र में पले–बढ़े होने के कारण उन्हें मराठी भाषा की भी अच्छी समझ है। विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के इस संगम ने उनके विचारों को व्यापक दृष्टि और उनकी अभिव्यक्ति को एक विशिष्ट संवेदनशीलता प्रदान की है।
उनका प्रथम कविता–संग्रह “ए मूर्ख, अपनी छवि सुधार” जीवन के उन विविध भावों और संबंधों का सजीव चित्रण है, जिनसे मनुष्य अनायास ही जुड़ा रहता है। इस संग्रह में प्रेम, विरह, संघर्ष, चुनौतियाँ, परिश्रम और जिम्मेदारियों जैसे जीवन के अनेक आयामों को आत्मचिंतन और संवेदनशील दृष्टि के साथ प्रस्तुत किया गया है।
केशव आशिष झा की कविताएँ केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को समझने, स्वयं को पहचानने और समाज के साथ अपने संबंधों पर विचार करने का एक सशक्त प्रयास हैं। उनकी लेखनी युवा संवेदनाओं, जीवनानुभवों और मानवीय रिश्तों की सूक्ष्मता को सहज और प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुँचाती है।
Keshav Jha की किताबें
₹156 से शुरू, हर किताब पर 20% छूट
इस खोज में कोई किताब नहीं मिलीदूसरा शब्द या दाम चुनकर देखें।
आपकी पसंद के आधार पर
आपके लिए चुनी गई किताबें
इस डिवाइस पर आपकी देखी गई किताबों के आधार पर
किताब नहीं मिल रही?
किताब और लेखक का नाम बताइए, हम बताएँगे कि क्या हम उसे आपके लिए मँगवा सकते हैं।
हमारा पूरा सूची-पत्र
हमारी सभी किताबें एक सूची में। पुस्तकालयों, स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं के लिए उपयोगी।