
लेखक
Rambaksh Jaat
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रामबक्ष जाट
जन्म 4 सितंबर 1951, राजस्थान के एक छोटे से गाँव चिताणी, जिला नागौर में एक किसान परिवार में हुआ। उस समय गाँव में कोई स्कूल न होने के कारण प्राथमिक स्तर तक की शिक्षा सेनणी और रूण में हुई। बचपन में जो गाँव छूटा, तो फिर छूट ही गया। उच्च शिक्षा जोधपुर और नई दिल्ली में हुई। लेकिन भावनात्मक रूप से गाँव मन में बसा रहा। नियमित अंतराल में गाँव से सम्पर्क बना रहा।
महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक सहित भारत के चार विश्वविद्यालयों में प्राध्यापन हेतु चयन हुआ। इनमें से जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। सन 2012 से 2014 तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा केंद्र के अध्यक्ष रहे। इग्नू की पाठ्य सामग्री के साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ई लर्निंग की महत्वाकांक्षी परियोजना ईपीजी पाठशाला में हिंदी के राष्ट्रीय समन्वयक रहे। इसके साथ स्कूल स्तर के पाठ्यक्रम निर्माण से भी सम्बद्ध रहे।
अनेक शोध पत्रों के साथ कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी, इनमें 'प्रेमचंद और भारतीय किसान', 'दादूदयाल', 'समकालीन हिंदी आलोचक और आलोचना' मुख्य है।
इस पुस्तक में उनका ललित गद्य लेखक का रूप सामने आया है।
जन्म 4 सितंबर 1951, राजस्थान के एक छोटे से गाँव चिताणी, जिला नागौर में एक किसान परिवार में हुआ। उस समय गाँव में कोई स्कूल न होने के कारण प्राथमिक स्तर तक की शिक्षा सेनणी और रूण में हुई। बचपन में जो गाँव छूटा, तो फिर छूट ही गया। उच्च शिक्षा जोधपुर और नई दिल्ली में हुई। लेकिन भावनात्मक रूप से गाँव मन में बसा रहा। नियमित अंतराल में गाँव से सम्पर्क बना रहा।
महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक सहित भारत के चार विश्वविद्यालयों में प्राध्यापन हेतु चयन हुआ। इनमें से जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। सन 2012 से 2014 तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा केंद्र के अध्यक्ष रहे। इग्नू की पाठ्य सामग्री के साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ई लर्निंग की महत्वाकांक्षी परियोजना ईपीजी पाठशाला में हिंदी के राष्ट्रीय समन्वयक रहे। इसके साथ स्कूल स्तर के पाठ्यक्रम निर्माण से भी सम्बद्ध रहे।
अनेक शोध पत्रों के साथ कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी, इनमें 'प्रेमचंद और भारतीय किसान', 'दादूदयाल', 'समकालीन हिंदी आलोचक और आलोचना' मुख्य है।
इस पुस्तक में उनका ललित गद्य लेखक का रूप सामने आया है।
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