• New product

Anjan Shatru

(0.00) 0 Review(s) 
2025
978-93-95226-85-1

Select Book Type

Earn 2 reward points on purchase of this book.
In stock

"आपने आज बहुत ही महत्त्वपूर्ण सहायता की है मिस्टर !" मेजर ने धीरे-धीरे कहा, "यह तो बहुत ही अच्छा सूत्र मिला है।" मैने देखा मिट्टी और कूड़े में सनी हुई रीछ की खाल की बनी कई पोशाकें जमीन पर फैली थीं। "एक दस्ताना पता नहीं क्या हुआ" मेजर ने जरा परेशानी से कहा। "यह लीजिए, इस झमेले में यह तो मेरी जेब में ही रह गया।" दूसरा दस्ताना मेजर को देते हुए मैंने कहा, "इसी को हिलते देखकर तो मुझे नीचे जाने की प्रेरणा मिली थी।" "और यह लो" मुट्टी भर कोई सफेद चूने जैसा पाउडर पोशाक की जेब से निकालते हुए मेजर बोले, "निश्चय ही यह बोरैक्स (सुहागा) है।" "सुगाहा तो मैंने सुना है उस पहले तथाकथित 'हिम-मानव' के पास से भी मिला था।" मैंने आश्चर्यचकित होकर पूछा, "क्या संबंध है इन 'हिम-मानवों' का सुहागे से ?"

You might also like

Reviews

No Reviews found.