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Maa (माँ)

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2026
9789347029080

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शाम के सात बज चुके हैं। विश्वनाथ तथा गोकुलप्रसाद चौक के सामने वाले पार्क में एक बेंच पर बैठे बातें कर रहे हैं। विश्वनाथ कह रहे हैं- "यार. बिना श्यामनाथ को सम्मिलित किये काम न चलेगा।" गोकुलप्रसाद - "क्यों?" विश्वनाथ- "बिना उसे सम्मिलित किये रौप्य खंड कहाँ से आयेंगे? एक सप्ताह से अधिक हो गया। मैं अभी बेगम साहबा को चकमे दे रहा हूँ। यहाँ बातों का काम नहीं है-बिना रुपये के दाल न गलेगी।" गोकुलप्रसाद- "आपके वे हथकंडे कहाँ गये?" विश्वनाथ- "सब जगह हथकंडे काम नहीं देते। दूसरे, यह बात भी तो है कि आखिर कुछ तो खर्च करना ही पड़ेगा। हमारी करामात इतनी है कि जहाँ रुपए का खर्च हो, वहाँ हम धेली चार आने में ही काम निकाल लेंगे। इतना कहाँ का थोड़ा है।" गोकुल - "बात तो उस्ताद, तब है, जब खाली पान-तंबाकू से ही काम निकालो।" विश्वनाथ- "वह भी हो जाता, अगर बीच वह छुट्टन दुष्ट न होता। उसके मारे दाल नहीं गलती।" गोकुल- "वह तो महागावदी है विश्वनाथ - "गावदी मत समझना, बड़ा बना हुआ है।" गोकुल- "उस पर तुम्हारा जादू काम नहीं कर सकता क्या?" विश्वनाथ- "वह बड़ा काईयाँ-न मालूम कितनों को चरा चुका है। उस पर जादू चलाना मज़ाक नहीं है।" गोकुल- "तो फिर श्यामनाथ को किसी दिन ले चलो।" विश्वनाथ- "किसी दिन क्या, आज ही न चलो।" गोकुल- "मगर श्यामनाथ कहाँ मिलेगा?" विश्वनाथ- "बंदी के यहाँ अवश्य मिलेगा।"

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