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Bhai Parmanand
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Bhai Parmanand

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भाई परमानन्द (4 नवंबर 1876 8 दिसंबर 1947) भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रवादी विचारक, प्रख्यात शिक्षाविद और आर्य समाज के प्रमुख नेता थे। उनका जन्म पंजाब के झेलम जिले (अब पाकिस्तान) के एक प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे सिख शहीद भाई मती दास के वंशज थे।

उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से एम.ए. की शिक्षा पूरी की और डी.ए.वी. कॉलेज, लाहौर में अध्यापन कार्य किया। भाई परमानन्द ने वैदिक धर्म और राष्ट्रवाद के प्रचार के लिए दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और अमेरिका जैसे कई देशों की यात्राएं कीं, जहाँ उन्होंने प्रवासियों को संगठित किया। वे ग़दर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।

प्रथम लाहौर षड्यंत्र केस (1915) में शामिल होने के कारण ब्रिटिश सरकार ने उन्हें पहले मृत्युदंड सुनाया, जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदलकर उन्हें अंडमान की 'कालापानी' जेल भेज दिया गया। जेल से रिहा होने के बाद वे लाहौर के नेशनल कॉलेज के चांसलर बने, जहाँ भगत सिंह और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों ने उनसे राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा ली।

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