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Meri Aap Beeti ( Kalapani ki karawas Kahani )

  • पेपरबैक
  • प्रकाशन वर्ष 2026
  • ISBN 9789347602498
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किताब के बारे में

भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में भाई परमानंद का नाम एक प्रखर राष्ट्रवादी, दूरदर्शी शिक्षाविद् और क्रांतिकारी के रूप में दर्ज है, जिन्होंने अपना जीवन मातृभूमि को समर्पित कर दिया। आर्य समाज के सिद्धांतों से प्रेरित उनका जीवन त्याग और संघर्ष की वह गाथा है जो हमेशा प्रेरित करती रहेगी। उनकी आत्मकथा 'मेरी आपबीती' केवल व्यक्तिगत संस्मरण नहीं, बल्कि बीसवीं सदी के स्वतंत्रता आंदोलन, ब्रिटिश दमन चक्र और राष्ट्रीय वैचारिक मंथन का एक सजीव व ऐतिहासिक दस्तावेज है। 'मेरी आपबीती' उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी में दशकों पहले प्रकाशित हुई थी, और तीनों संस्करणों में थोड़ा अंतर है। उर्दू और हिंदी के प्रथम मूल संस्करण में उनकी कालापानी की यातना तक का विवरण है, जबकि अंग्रेजी संस्करण में भाग 2 जोड़कर जेल के बाद के जीवन की झलक और पत्नी के नाम लिखा ऐतिहासिक पत्र भी शामिल किया गया है। हिंदी के इस वर्तमान संस्करण में सभी भाषाओं के संस्करणों की संपूर्ण सामग्री समाहित की गई है, जिससे यह पुस्तक भाई परमानंद की मूल प्रामाणिक एवं संपूर्ण आत्मकथा बन गई है। यह आम पाठकों के साथ-साथ इतिहास के शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए भी बेहद उपयोगी है। भाई परमानंद उन गिने-चुने स्वतंत्रता सेनानियों में थे जिन्हें ब्रिटिश हुकूमत ने सबसे खतरनाक विद्रोहियों की सूची में रखा था। 'मेरी आपबीती' का सबसे महत्वपूर्ण खंड अंडमान की सेल्यूलर जेल (काला पानी) की सजा से संबंधित है, जहाँ उन्होंने देशभक्तों को दी जाने वाली अमानवीय प्रताड़नाओं और कोल्हू चलवाने जैसे अक्लांत श्रम का मर्मस्पर्शी वर्णन किया है ।

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