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'Coolie' Se Kuleen Banane Ka Safar
कविता क्या है? 'कोई पहनावा है, कुर्ता पजामा है? ना भाई ना! कविता शब्दों की अदालत में मुजरिम के कटघरे में खड़े बेकसूर आदमी का हलफनामा है। क्या वह व्यक्तित्व बनाने की, चरित्र चमकाने की, खाने-कमाने की चीज है? ना भाई ना! कविता भाषा में आदमी होने की तमीज है।" -धूमिल धूमिल जी की यह कविता मुझे हमेशा प्रभावित करती है क्योंकि कविता केवल मन के भावों को आवाज देने का माध्यम नहीं है। यदि कोई चाहे, तो कविता के रास्ते खोए हुए मानवीय मूल्यों को पुनर्जन्म दिया जा सकता है। इसी भावना से प्रेरित होकर मैंने कविता को आदमी की भाषा में जीवित रखने और खोए हुए मानवीय मूल्यों को वापस लाने का एक छोटा-सा प्रयास किया है। मेरी कविताओं का मूल विषय है- 'गिरमिट' श्रमिकों का भारत से प्रवासन, उनका नारकीय जीवन, धर्म, संस्कृति, भाषा और जीवन मूल्य। इन कविताओं में गिरमिट' समाज में विकसित भाषाई, सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक प्रथाओं को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। यह पुस्तक 'गिरमिट' प्रथा के अनुभवों की जटिलता को तटस्थ दृष्टिकोण से प्रकट करती है और गिरमिट समाज के अनुकूलन, उत्तरजीविता, प्रतिरोध और समुदाय निर्माण के मानवीय आयामों का दस्तावेजीकरण करती है। ये कविताएँ गिरमिट श्रमिकों की सच्ची कहानियाँ बयान करती है, जो बताती हैं कि कैसे उन्होंने विपरीत
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