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Aaj Bhi Khare Hai Talab

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  • प्रकाशन वर्ष 2026
  • ISBN 9789347602467
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किताब के बारे में

वृंदावनलाल वर्मा के उपन्यास 'रानी दुर्गावती' में भी बदेलखंड क्षेत्र में पारस से बनने वाले तालाबों का उल्लेख एक अलग अर्थ में मिलता है। जबलपुर प्राधिकरण द्वारा सन् 1977 में प्रकाशित जबलपुर स्मारक ग्रंथ में भी इस कथा की झलक है। जबलपर के पास ही सन 1939 में हुए प्रसिद्ध त्रिपुरी कांग्रेस सम्मेलन के अवसर पर छपी 'त्रिपुरी कांग्रेस गाइड' में भी इस कथा में वर्णित क्षेत्र के कई भव्य तालाबों का विवरण दिया गया था। आज़ादी की लडाई के बीच आयोजित इस ऐतिहासिक सम्मेलन में. जहाँ सुभाषचंद्र बोस और पट्टाभि सीतारमैया जैसे नेता उपस्थित थे, वहाँ भी तालाबों का उल्लेख अप्रासंगिक नहीं माना गया था। पर इस प्रसंग की तुलना कीजिए, सन् 1991 के तिरुपति कांग्रेस अधिवेशन से। जल संकट से घिरे कठिन दौर में आयोजित इस सम्मेलन का पंडाल कभी के एक भव्य पर अब सूख चुके अविलल नामक तालाब के आगर पर ही ताना गया था। आगर की नमी के कारण पंडाल के भीतर का तापमान बाहर की गर्मी से 4 अंश कम था। लेकिन इस अधिवेशन में उपस्थित हमारे नए आत्ममुग्ध नेताओं ने देश के सामने छाए तरह-तरह के संकटों से पार उतरने में लोकबुद्धि पर कोई भरोसा नहीं जताया। इसी तरह सन् 1993 का कांग्रेस अधिवेशन भी दिल्ली की सीमा पर सूरजकुंड में हुआ था। वह ऐतिहासिक तालाब भी आज पट चुका है। तालाबों की सर्वत्र की जा रही उपेक्षा के अनुपात में ही पानी का संकट बढ़ता जा रहा है।

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