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Chandrabali Pandey
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Chandrabali Pandey

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24 अप्रैल, 1994, আমার (ত..) कृणु: 24 जनवरी, 1958
शिक्षा: एम.ए. (हिंदी) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी।
साहित्य एवं भाषा आंदोलन से जुड़ाव : इन्होंने संपूर्ण जीवन साहित्य लेखन और हिंदी प्रचार में लगाया। साहित्य सम्मेलन के सभापति रहे। नागरी प्रचारणी सभा के भी सभापति चुने गये थे। 'हिंदी' मासिक पत्रिका के संपादक भी रहे। हिंदी-उर्दू-हिन्दुस्तानी भाषा विवाद पर इनकी कई पुस्तकें एवं पैफ्लेट महत्वपूर्ण है। इन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता दिलाने के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई। इनकी छोटे-यही कुल कितावों की संख्या 34 है।
रचनाएं : तसब्बुफ अथवा सूफीमत, कालिदास, शूद्रक, मुसलमान, विचार-विमर्श, तुलसीदास, तुलसी की जीवन भूमि, केशवदास, हिंदी गद्य का निर्माण, साहित्य संदीपनी, हिंदी कवि चर्चा, एकता। स्वप्न सिद्धांत (मरणोपरान्त प्रकाशित) माया राष्ट्रभाषा पर विचार, भाषा का प्रश्न, विहार में हिन्दुस्तानी, मुगल बादशाहों की हिंदी, उर्दू का रहस्य, कचहरी की भाषा एवं लिपि,
नागरी का अभिशाप, अनुराग बाँसुरी का संपादन। पुरस्कार : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'तसव्वुफ अववा सूफीमत', 'केशवदास', 'शक' रचनाओं पर पुरस्कार प्राप्त हुए किन्तु 'कालिदास' रचना पर पुरस्कार की घोषणा की गयी परन्तु चन्द्रवली पहिय जी ने पुरस्कार
अस्वीकार कर दिया।

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