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लेखक
Chandrmohan Pradhan
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चन्द्रमोहन प्रधान
जन्म : 30 दिसम्बर, 1940
1961 गवर्नमेंट आर्ट कॉलेज पटना से पंचवर्षीय डिग्री 1962 लेखन आरंभ, धर्मयुग, सारिका, हंस, कथाक्रम आदि सभी शीर्षस्थ पत्रिकाओं में
नियमित लेखन। पाठकों में लोकप्रियता ।
सम्मान पुरस्कार : कई कला प्रदर्शनियों, कथा प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत । अमेरिकी कथा पत्रिकाओं में कथा प्रकाशन । अमेरिकी बायोग्राफिकल इन्स्टीच्यूट द्वारा 'मैन ऑफ द इयर 2001' सम्मान अवंतिका कला सम्मान, नई दिल्ली, रचनाकार भारती द्वारा राष्ट्रकवि दिनकर राष्ट्रभाषा सम्मान, सर्वोच्च साहित्य साधना सम्मान', बिहार सरकार, नवयुवक समिति ट्रस्ट द्वारा साहित्यिक सम्मान, अभिधा सम्मान, महाकवि राकेश स्मृति शिखर सम्मान, जेसीज़ साहित्यकार सम्मान, भारतेन्दु परिषद् कोटा द्वारा साहित्यिक सम्मान आदि। रचनाएँ- कथा संकलन जिस गाँव नहीं जाना, रिश्ते, शहर पिघल रहा है, नींद का शहर जागता सपना। उपन्यास एकलव्य, एक लड़की बंजारन, हाँ मेरे मालिक ।
शीघ्र प्रकाशन एक दिगभ्रमित कथा (उपन्यास), भारतीय ज्ञान-विज्ञान की मौलिकता और विश्व पर उसका प्रभाव (शोधग्रंथ)
प्रसारण कन्नड़, मराठी, उर्दू, गुजराती, उड़िया, अंग्रेजी आदि अनेक भाषाओं में कथाएँ प्रकाशित, रेडियो पर प्रसारण, इंटरनेट पर कथा प्रसारण।
संप्रति : विभिन्न सामाजिक संस्थानों, शिक्षण संस्थानों का संचालन तथा स्वाधीन लेखन।
जन्म : 30 दिसम्बर, 1940
1961 गवर्नमेंट आर्ट कॉलेज पटना से पंचवर्षीय डिग्री 1962 लेखन आरंभ, धर्मयुग, सारिका, हंस, कथाक्रम आदि सभी शीर्षस्थ पत्रिकाओं में
नियमित लेखन। पाठकों में लोकप्रियता ।
सम्मान पुरस्कार : कई कला प्रदर्शनियों, कथा प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत । अमेरिकी कथा पत्रिकाओं में कथा प्रकाशन । अमेरिकी बायोग्राफिकल इन्स्टीच्यूट द्वारा 'मैन ऑफ द इयर 2001' सम्मान अवंतिका कला सम्मान, नई दिल्ली, रचनाकार भारती द्वारा राष्ट्रकवि दिनकर राष्ट्रभाषा सम्मान, सर्वोच्च साहित्य साधना सम्मान', बिहार सरकार, नवयुवक समिति ट्रस्ट द्वारा साहित्यिक सम्मान, अभिधा सम्मान, महाकवि राकेश स्मृति शिखर सम्मान, जेसीज़ साहित्यकार सम्मान, भारतेन्दु परिषद् कोटा द्वारा साहित्यिक सम्मान आदि। रचनाएँ- कथा संकलन जिस गाँव नहीं जाना, रिश्ते, शहर पिघल रहा है, नींद का शहर जागता सपना। उपन्यास एकलव्य, एक लड़की बंजारन, हाँ मेरे मालिक ।
शीघ्र प्रकाशन एक दिगभ्रमित कथा (उपन्यास), भारतीय ज्ञान-विज्ञान की मौलिकता और विश्व पर उसका प्रभाव (शोधग्रंथ)
प्रसारण कन्नड़, मराठी, उर्दू, गुजराती, उड़िया, अंग्रेजी आदि अनेक भाषाओं में कथाएँ प्रकाशित, रेडियो पर प्रसारण, इंटरनेट पर कथा प्रसारण।
संप्रति : विभिन्न सामाजिक संस्थानों, शिक्षण संस्थानों का संचालन तथा स्वाधीन लेखन।
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