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Editor: Rambaksh
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रामबक्ष
जन्म 4 सितम्बर, 1951, चिताणी, नागौर (राजस्थान) में एक किसान परिवार में हुआ। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव में एवं उच्च शिक्षा जोधपुर में हुई। सन् 1980 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से उन्होंने पी-एच.डी. (हिन्दी) की उपाधि ली। सन् 1978 से महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय रोहतक में अध्यापन कार्य शुरू किया, तत्पश्चात जोधपुर और इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली में अध्यापन किया। सन् 2008 से वे भारतीय भाषा केन्द्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली में प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। सन् 2012-14 में वे भारतीय भाषा केन्द्र के अध्यक्ष रहे। कई शैक्षिक संस्थानों के शासी निकायों के सदस्य हैं। सावधान आलोचना-दृष्टि, भाषा की सरलता और पाठ के गूद्रार्य विश्लेषण की सहज वृत्ति के कारण हिन्दी- आलोचना में बीसवीं शताब्दी के आठवें दशक की शुरुआत में ही उनकी विशिष्ट पहचान बन गयी थी। प्रेमचन्द साहित्य और किसान जीवन उनके अनुशीलन का प्रिय क्षेत्र है। देश के विशिष्ट प्रकाशन संस्थानों द्वारा प्रकाशित अनेक शोध-पत्रों एवं आलोचनात्मक पुस्तकों में से उनकी कुछ महत्त्वपूर्ण पुस्तकें हैं- प्रेमचन्द और भारतीय किसान, समकालीन हिन्दी आलोचक और आलोचना, दादू दयाल आदि।
जन्म 4 सितम्बर, 1951, चिताणी, नागौर (राजस्थान) में एक किसान परिवार में हुआ। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव में एवं उच्च शिक्षा जोधपुर में हुई। सन् 1980 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से उन्होंने पी-एच.डी. (हिन्दी) की उपाधि ली। सन् 1978 से महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय रोहतक में अध्यापन कार्य शुरू किया, तत्पश्चात जोधपुर और इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली में अध्यापन किया। सन् 2008 से वे भारतीय भाषा केन्द्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली में प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। सन् 2012-14 में वे भारतीय भाषा केन्द्र के अध्यक्ष रहे। कई शैक्षिक संस्थानों के शासी निकायों के सदस्य हैं। सावधान आलोचना-दृष्टि, भाषा की सरलता और पाठ के गूद्रार्य विश्लेषण की सहज वृत्ति के कारण हिन्दी- आलोचना में बीसवीं शताब्दी के आठवें दशक की शुरुआत में ही उनकी विशिष्ट पहचान बन गयी थी। प्रेमचन्द साहित्य और किसान जीवन उनके अनुशीलन का प्रिय क्षेत्र है। देश के विशिष्ट प्रकाशन संस्थानों द्वारा प्रकाशित अनेक शोध-पत्रों एवं आलोचनात्मक पुस्तकों में से उनकी कुछ महत्त्वपूर्ण पुस्तकें हैं- प्रेमचन्द और भारतीय किसान, समकालीन हिन्दी आलोचक और आलोचना, दादू दयाल आदि।
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