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Mohammad zakir Hussain
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Mohammad zakir Hussain

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डॉ. मो. जाकिर हुसैन का जन्म 10 फरवरी 1967 को बिहार के वर्तमान मधुबनी जिला के बौंसी (बाबू बरही) गांव के एक मध्य वर्ग के शिक्षित परिवार में हुआ। शिक्षा प्राप्त करने के बाद मई 1992 में वह विश्व का प्रसिद्ध ज्ञानकुंज खुदा बख्श लाइब्रेरी से जुड़ गए। इस अवधि में इन्होंने उर्दू, फारसी और अरबी तीनों भाषाओं की चार दुर्लभ पाण्डुलिपियों का संपादन किया जो इसी लाइब्रेरी से प्रकाशित हो चुकी हैं: । खुलासरा अनीसुल तालिबीन (फारसी, सूफी साहित्य, 1996), 2-मखजने फवायद (उर्दू शब्दकोश, 1998), 3-इख्तियारुल रफीक (अरबी, सूफी साहित्य, 1998), 4-दीवाने अजहर अली आजाद काकोरवी (फारसी कविता, 2001)। हिंदी में इनकी तीन किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। उर्दू भाषा एवं साहित्य विषयक छह पुस्तकें छप चुकी हैं: 1857 और इमाम बख्त सहवाई (संवेद, दिल्ली, 2012), 1857 और बिहार की पत्रकारिता (प्रभात प्रकाशन, दिल्ली, 2013), दिल से जो बात निकली गजल हो गईः कलीम आजिज की गजलों का संग्रह (वाणी प्रकाशन, दिल्ली, 2014), इमाम बख्श सहबाई को अदवी खिदमात (2002), मुहावराते निकहत (2003), अफकारे जाकिर मकातीव की रोशनी में (2002), फरहगे आसफिया का माखज और दूसरे मजामीन (2013), नविल दो गज जमीन की हकीकत (2014) और बरें सगीर हिंद का अलमियाः डॉ. रजो अहमद की हिंदी किताब का उर्दू अनुवाद (2014)। उन्होंने हिन्दी, उर्दू, फारसी एवं अरबी भाषाओं में अनेक शोधपरक और गंभीर आलोचकीय महत्व की किताबें और विस्तृत आलेख लिखे हैं। पुराने तजकिरों के साथ आधुनिक कवियों और कथाकारों पर उनको कितायें उनको विस्तृत और गहरी योग्यता के आयाम सिद्ध करती हैं।

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