
लेखक
Sadhu Krishnkam Haridas
- 1किताबें
- 0फ़ॉलोअर
- 437बार देखा गया
साधु कृष्णकाम हरिदास
जन्म : 07 नवम्बर, 1832, ग्राम-मकया (असरगंज) जिला-मुंगेर, (बिहार) के एक सम्पन्न-सम्भ्रात वैष्णव परिवार में।
शिक्षा: एम.ए. (दर्शन शास्त्र) पटना विश्वविद्यालय। सन्त कोलम्बा कॉलेज हजारीयाग (झारखण्ड), टी.एन.वी. कॉलेज, भागलपुर (विहार) एवं स्नातकोत्तर दर्शन शास्त्र विभाग, तिलकामाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर में। फरवरी 1995 में विश्वविद्यालय प्राचार्य-पद से सेवा-निवृत्त। तुलनात्मक धर्म-दर्शन के विशिष्ट व्याख्याता के रूप में प्रसिद्ध।
अन्य सेवा-कार्य तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में कुलानुशासक एवं वयस्क शिक्षा-निदेशक के पदों से वर्षों सेवा-कार्य।
वर्तमान स्थिति: अक्टूबर 2009 में गृहत्याग कर 30 नवम्बर 2009 को श्री वृन्दावन में, एक वैष्णव साधु के साक्षित्व में यमुना-तट पर संन्यासपूर्वक साधुवेश ग्रहण। अब मूल नाम प्रो. योगानन्द दास से संन्यास का नाम साधु कृष्णकाम हरिदास। तबसे परिवर्तित नाम-रूपादि के साथ एक नये जीवन का आरम्भ। परिभ्रमण करते हुए, लीक से हटकर आध्यात्मिक प्रवचन में संलग्न। सम्प्रति मुख्यतः श्री वृन्दावन एवं हरिद्वार में वास।
प्रकाशन : स्वतन्त्र पुस्तक रूप में 'चन्दन वन' प्रथम कृति। स्फुट रूप में लम्बे समय से विभिन्न पत्रिकाओं में अध्यात्म, दर्शन, संस्कृति विषयक अनेक लेख प्रकाशित तथा आकाशवाणी केन्द्रों से अनेक वार्ताएँ प्रसारित।
सम्पर्क सूत्र : श्री हरिगिरि निरंजन आश्रम, संन्यास मार्ग, कनाल, हरिद्वार-249408 (उत्तराखण्ड) मो. 09836606196
जन्म : 07 नवम्बर, 1832, ग्राम-मकया (असरगंज) जिला-मुंगेर, (बिहार) के एक सम्पन्न-सम्भ्रात वैष्णव परिवार में।
शिक्षा: एम.ए. (दर्शन शास्त्र) पटना विश्वविद्यालय। सन्त कोलम्बा कॉलेज हजारीयाग (झारखण्ड), टी.एन.वी. कॉलेज, भागलपुर (विहार) एवं स्नातकोत्तर दर्शन शास्त्र विभाग, तिलकामाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर में। फरवरी 1995 में विश्वविद्यालय प्राचार्य-पद से सेवा-निवृत्त। तुलनात्मक धर्म-दर्शन के विशिष्ट व्याख्याता के रूप में प्रसिद्ध।
अन्य सेवा-कार्य तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में कुलानुशासक एवं वयस्क शिक्षा-निदेशक के पदों से वर्षों सेवा-कार्य।
वर्तमान स्थिति: अक्टूबर 2009 में गृहत्याग कर 30 नवम्बर 2009 को श्री वृन्दावन में, एक वैष्णव साधु के साक्षित्व में यमुना-तट पर संन्यासपूर्वक साधुवेश ग्रहण। अब मूल नाम प्रो. योगानन्द दास से संन्यास का नाम साधु कृष्णकाम हरिदास। तबसे परिवर्तित नाम-रूपादि के साथ एक नये जीवन का आरम्भ। परिभ्रमण करते हुए, लीक से हटकर आध्यात्मिक प्रवचन में संलग्न। सम्प्रति मुख्यतः श्री वृन्दावन एवं हरिद्वार में वास।
प्रकाशन : स्वतन्त्र पुस्तक रूप में 'चन्दन वन' प्रथम कृति। स्फुट रूप में लम्बे समय से विभिन्न पत्रिकाओं में अध्यात्म, दर्शन, संस्कृति विषयक अनेक लेख प्रकाशित तथा आकाशवाणी केन्द्रों से अनेक वार्ताएँ प्रसारित।
सम्पर्क सूत्र : श्री हरिगिरि निरंजन आश्रम, संन्यास मार्ग, कनाल, हरिद्वार-249408 (उत्तराखण्ड) मो. 09836606196
Sadhu Krishnkam Haridas की किताबें
₹240 से शुरू, हर किताब पर 20% छूट
इस खोज में कोई किताब नहीं मिलीदूसरा शब्द या दाम चुनकर देखें।
आपकी पसंद के आधार पर
आपके लिए चुनी गई किताबें
इस डिवाइस पर आपकी देखी गई किताबों के आधार पर
किताब नहीं मिल रही?
किताब और लेखक का नाम बताइए, हम बताएँगे कि क्या हम उसे आपके लिए मँगवा सकते हैं।
हमारा पूरा सूची-पत्र
हमारी सभी किताबें एक सूची में। पुस्तकालयों, स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं के लिए उपयोगी।