Shripat Rai

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About Shripat Rai

श्रीपत राय का जन्म 16 जुलाई 1916 को गोरखपुर में हुआ। वह बहुआयामी व्यक्तित्व वाले लेखक, संपादक, आलोचक, और चित्रकार थे। 'कहानी' पत्रिका, जिसका पहला अंक 1937 में आया, के संपादन द्वारा उन्होंने हिन्दी कहानी को नई दिशा दी। वे उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद के बड़े बेटे थे और प्रेमचंद के स्थापित किए हुए सरस्वती प्रकाशन को उन्होंने सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया। उसी के ज़रिये उन्होंने एक पूरी पीढ़ी की साहित्यिक चेतना और रुझान को गढ़ा। एक अद्भुत पारखी नज़र के धनी, उन्होंने 'कहानी' में हिन्दी के लगभग उन सभी कथाकारों की कहानियाँ छापीं जो आगे चलकर हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार बने। इस तरह से 'नई कहानी' आंदोलन की अगुवाई करने में उनकी भूमिका महत्त्वपूर्ण है। सरस्वती प्रेस से ही श्रीपत राय ने कुछ समय तक 'उपन्यास', 'साहित्यालोचन' जैसी पत्रिकाओं का प्रकाशन भी किया। उन्होंने एक प्रकाशन योजना 'गल्प संसार माला' की शुरूआत की जिसमें बाँग्ला, तमिल और कुछ अन्य भाषाओं से हिंदी में अनूदित कहानियाँ छपीं। बाद में विदेशी भाषाओं से चयनित कहानियों के अनुवाद और कुछ महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन भी इसके अंतर्गत हुआ। इस तरह से हिन्दी साहित्य का दायरा विकसित करने की उपलब्धि भी उन्हीं की है। हिन्दी में आधुनिकता वोघ लाने और उसे बढ़ावा देने में उनका खास योगदान है। श्रीपत राय ने खुद भी अकलंक मेहता के नाम से कई कहानियाँ लिखीं। वह एक प्रतिभाशाली चित्रकार भी थे और उनकी चित्रकला के प्रति प्रतिवद्धता का प्रमाण उनके बनाए हुए चित्र हैं, जिनकी प्रदर्शनियाँ बराबर हुई। चित्रों पर उनके अनेक आलेख हैं, जिस क्षेत्र में उन्होंने अपनी एक विशेष पहचान बनाई। श्रीपत राय का निधन 9 जुलाई 1994 को इलाहाबाद में हुआ।

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