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Kahani Ki Baat
कहानी' का सर्वप्रथम प्रकाशन 1937 में हुआ। उस समय उसकी पाठक-संख्या किसी भी अन्य पत्र-पत्रिका से अधिक थी। द्वितीय महायुद्ध के प्रारंभ होते ही 1939 में कागज का ऐसा अकाल पड़ा कि मुझे विवश होकर, मन मारकर 'कहानी' का प्रकाशन बंद कर देना पड़ा। पर 'कहानी' का वह अधूरा सपना मुझे बराबर उद्वेलित करता रहा। 1953 में उस सपने को साकार कर सका और तब से 1979 के अंत तक, छब्बीस वर्षों तक, उसका मैंने नियमित प्रकाशन किया। 1979 में 'कहानी' के संपादन का बड़ा बोझ मेरी सीमित शक्ति से परे हो गया और मैंने यही उचित समझा कि उसे बंद कर दूं क्योंकि उसका स्तर और महत्त्व में कम नहीं कर सकता था। वह निर्णय मुझे आज भी उचित प्रतीत होता है। 1953 से 1959 तक मैं नियमित संपादकीय नहीं लिखता था-वह काम मेरे सहकारी करते थे। अवश्य मैं वार्षिकांकों का संपादकीय लिखता था। वे विशेषांक आज भी बड़े सम्मान से याद किये जाते हैं। - श्रीपत राय
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