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75 Kavitayen : Jitendra Shristav
जितेन्द्र श्रीवास्तव हिंदी के प्रतिष्ठित कवि हैं। लगभग चार दशकों से उनका कवि-कर्म सक्रिय और प्रभावशाली रहा है। उल्लेख किया जा सकता है कि कवि की पहली प्रकाशित कविता 'हिमपात' (1986) से लेकर अब तक प्रकाशित कविताएं लगभग पांच सौ हैं। कविता, कहानी, आलोचना, संपादन, संस्मरण आदि साहित्य की विविध विधाओं में अपनी रचनाशीलता ने उन्हें बहुमुखी प्रतिभासंपन्न साहित्यकार सिद्ध किया है। बावजूद इसके जितेन्द्र मूलतः कवि के रूप में ख्यात और प्रसिद्ध हैं। उनकी अब तक की कविताओं से गुजर कर पचहत्तर कविताओं का चयन करना सबसे कठिन कार्य था। यह इसलिए कि कवि ने अपने को रिपीट होने से बचाया है। ढर्रे पर कविता लिखना अथवा कौशल से कविता पेश करना इस कवि की सृजनशीलता का स्वभाव नहीं है। बहरहाल इस चयन में अपनी रुचि और समझ को आधार बनाया गया है। प्रत्येक संग्रह में वैविध्य सबसे अहम् वैशिष्ट्य है। इसलिए, विविध संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने वाली कविताओं पर भी ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया गया है। कवि के 'इन दिनों हालचाल' (2000/2011), 'अनभै कथा' (2003), 'असुंदर सुंदर' (2008), 'बिल्कुल तुम्हारी तरह' (2011), 'कायांतरण' (2012), 'सूरज को अंगूठा' (2020), 'जितनी हँसी तुम्हारे होंठों पर' (2022), 'काल मृग की पीठ पर' (2024) कविता संग्रहों ने कवि की ख्याति और प्रसिद्धि को उत्तरोत्तर प्रसरित किया। 'कवि ने कहा', 'उजास', 'रक्त-सा लाल एक फूल' जैसे जितेन्द्र के कविता संकलनों को कविता के पाठकों का भरपूर प्रेम मिला। सुप्रसिद्ध आलोचकों से लेकर युवा आलोचकों ने जितेन्द्र के कवि-कर्म की खूब सराहना की। यह इस बात का सबूत है कि जितेन्द्र की कविताएं कविता प्रेमियों को हमेशा लुभाती रही हैं।
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