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Aakash Ke Ladake
उस वैज्ञानिक औद्योगिक यग में वह सर्वश्रेष्ठ नगर था। जर्मन आक्रमण के समय न्यूयार्क शहर संसार भर में सबसे अधिक धनी, बड़ा शिल्पकला तथा वास्तुकला की भव्यता आदि में वह और उसके निवासी वेनिस वह विश्व का आर्थिक, व्यापारिक और मनोरंजन का केंद्र था। चित्रकला, की प्रतिमूर्ति थे। सभी राष्ट्रों के झंडे उसके बंदरगाह पर फहरा रहे थे। वह अन्य देशों में आयात-निर्यात करता था। योरप के लिये वह अमेरिका का और अमेरिका के लिये वह विश्व भवन का द्वार। किंतु जहाँ वह कई बातों में विश्व भर में श्रेष्ठतम नगर था वहीं कुछ कारणों से वह उतना ही बुरा भी था। उसमें आंतरिक रूप में अराजकता फैली हई थी। जहाँ एक ओर भव्य प्रासाद अपनी महत्ता प्रदर्शित करते थे, जहाँ एक ओर लोग धन-धान्यशाली थे वहीं दूसरी ओर अभागी बह भाषा भाषिणी जनता खरहों के बिलों जैसे मकानों में रहती थी और सरकार का इस ओर लेशमात्र भी ध्यान न आकर्षित हुआ था। नगर में असंख्य बुराईयाँ थीं। विभिन्न अपराध होते थे। इसकी सड़कों पर भव्यता के साथ ही दुख और सभ्यता के साथ ही अराजकता के प्रत्यक्ष दर्शन होते थे। वह एक महाद्वीप का धन हड़प किये हुए बैठा था। जैसे कि एक बार रोम ने भूमध्यसागर का और बेबीलौन ने पूर्व का धन हड़प किया था। न्यूयार्क वासी अन्य राष्ट्रों से घृणा करते हुए भोगलिप्त थे।
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