सीधे सामग्री पर जाएँ

हर ₹100 की खरीदारी पर 2 अंक पाएँ, 1 अंक = ₹1और जानें

Upanyas/उपन्यास

Aatmao Ke Sarab

  • पेपरबैक
  • प्रकाशन वर्ष 2026
  • ISBN 9789347029325
₹240 MRP ₹300 20% छूट

इस किताब पर आपकी बचत ₹60

संस्करण चुनें

स्टॉक में है, विक्रेता: नयी किताब प्रकाशन

  • 5 अंक पाएँअगले ऑर्डर पर ₹5 की छूट
  • UPI, कार्ड या कैश ऑन डिलीवरीसुरक्षित भुगतान, जैसे चाहें
  • सीधे प्रकाशक सेमूल संस्करण, MRP से कम दाम पर
  • इस किताब के बारे में सवाल?WhatsApp पर पूछें
सदस्यों को ऑनलाइन ख़रीद पर 5% अतिरिक्त छूट। सदस्यता मुफ़्त।और जानें
पुस्तकालय या स्कूल के लिए 10 या ज़्यादा प्रतियाँ चाहिए?दाम पूछें

किताब के बारे में

राजीव प्रकाश सहिर के नावेल आत्माओं के सराब पढ़ने के बाद मुझे फौरी तौर पर जो एहसास हुआ वह यह था कि यह कोई आम नावेल नहीं है। यह एक बहुत अहम नावेल है जिसमें एक मखसूस तारीखी शुऊर और अहदे हाजिर का इन्तेहाई फ़नकाराना मिलाप सामने आता है। उत्तराखंड और अवध की तहजीब नीज उसके एक गुमशुदा और नादीदा रिश्ते को राजीव प्रकाश साहब ने जिस तख़लीक्ती जेहानत और उम्दगी के साथ उजागर किया है वह अपनी मिसाल आप है। प्लाट, किरदार निगारी और मंजर निगारी के हवाले से भी यह नॉवेल याद रखे जाने के क़ाबिल है और इस पर खैर मुझे कोई हैरत भी नहीं है, क्योंकि इस नॉवेल से पहले मैं उनके अफसाने पढ़ चुका हूं और फिक्शन लिखने पर उनकी कुदरत और गिरफ्त का क़ायल हो चुका हूं। इस नावेल को महौलियात की शेरियात के ताल्लुक्क से बहुत अहम माना जा सकता है। मुझे बार बार इस नावेल को पढ़ते वक्त 'रूसो' का यह कौल याद आता रहा है कि जंगलों की तरफ लौट चलो Back to forest मगर जहां 'रूसो' का नजरिया फ़ितरत के हवाले से इन्तेहा पसन्द हद तक 'रूमानी' कहा जा सकता है वहां यह नावेल इस इन्तेहा पसन्द रूमानी रवैये से अपना दामन कमाल महारत के साथ साफ़ बचा ले जाता है। आत्माओं के सराब से यही मतलब अख्त किया जाना चाहिए कि आत्मा जिसे हम शुऊर या चेतना भी कह सकते हैं वह किस तरह ठगी जाती है। हिंदुस्तानी फलसफे में जिसे 'माया' कहा जाता है वह हमेशा 'आत्म' के लिए एक सराब है या Illusion ही बनकर सामने आती है। इस नावेल के बेशतर किरदारों के शऊर की यही सूरते हाल है कि वह सियासत या मजहबी सियासत के मायाजाल से हमेशा ठगे जाते और शिकस्त खाते हुए नजर आते हैं। गोमती नदी के जरिए महेज अवध की तहजीब के तारीखी और सकाफ़ती अनासिर की नुमाइन्दगी ही मक्तसूद नहीं थी बल्कि नदी बदलते हुए वक़्त की नुमाइन्दगी भी करती है। नदी बह रही है, वक़्त बह रहा है, तारीख बह रही है और माजी हमेशा एक सराब साबित होता है क्योंकि बक्तौल यूनानी फ़लसफ़ी Heraculus 'तुम एक हो नदी में दो बार नहीं नहा सकते'। मेरा ख्याल है कि नावेल में जंगल का जिस अंदाज में बयान किया गया है वह महेज फ़ितरत की अक्कासी नहीं है बल्कि जंगल को अदम का इसतेआरा बनने के इमकान को भी मद्देनजर रखना चाहिए जहां सब कुछ बिल आखिर गुम हो जाता है।

पढ़ने के लिए नई किताबें

कुछ किताबें देखिए, फिर हम आपकी पसंद की किताबें सुझाने लगेंगे

पाठकों की समीक्षाएँ

किताब ख़रीदने वाले पाठकों की राय

–अभी कोई रेटिंग नहीं

यह किताब पढ़ी है? आपकी समीक्षा से दूसरे पाठकों को मदद मिलेगी।

समीक्षा लिखने के लिए लॉग इन करें
अभी कोई समीक्षा नहींAatmao Ke Sarab पर अपनी राय लिखने वाले पहले पाठक बनें।

आपको ये भी पसंद आ सकती हैं

Upanyas/उपन्यास की और किताबें

पुस्तकालय, स्कूल या दुकान के लिए ख़रीद रहे हैं?

किताबों के नाम और प्रतियों की संख्या भेजें। हम WhatsApp पर दाम बता देंगे।

कोई और किताब ढूँढ रहे हैं?

हमारा पूरा सूची-पत्र डाउनलोड करें, या जो किताब साइट पर न मिले, उसके लिए हमें लिखें।

इस किताब की ख़रीद से जुड़े सवाल

यह किताब किन संस्करणों में मिलती है?

पेपरबैक: ₹240 (MRP ₹300)।

क्या कैश ऑन डिलीवरी (COD) की सुविधा है?

हाँ। चेकआउट पर कैश ऑन डिलीवरी चुनें, या UPI, कार्ड या नेट बैंकिंग से ऑनलाइन भुगतान करें।

मुझे कितने अंक मिलेंगे?

हर ₹100 की ख़रीद पर 2 अंक मिलते हैं। इस किताब के पेपरबैक संस्करण पर 5 अंक मिलेंगे, यानी अगले ऑर्डर पर ₹5 की छूट।

क्या सदस्यों को अलग से छूट मिलती है?

हाँ। सदस्यों को हर ऑनलाइन ऑर्डर पर 5% अतिरिक्त छूट मिलती है, और सदस्यता बिल्कुल मुफ़्त है। सदस्यता देखें।

Aatmao Ke Sarabपेपरबैक
₹240₹300
कार्ट देखें
Aatmao Ke Sarab - Rajeev Prakash Sahir - किताब का कवर इस किताब के बारे में पूछें