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Adarsh Balak
आचार्य चतुरसेन जी के द्वारा लिखित आदर्श बालक से एक कहानी ध्रुव का कुछ अंश महाराज मन के पुत्र राजा उत्तानपाद के दो रानियाँ थीं, बडी रानी का नाम सुनीती, और छोटी का सुरुचि था। सुनीती के बेटे का नाम ध्रुव और सुरुचि के बेटे का नाम उत्तम था। महाराज उत्तान पाद छोटी रानी हमे ज्यादा प्रेम करते थे, सारा अधिकार छोटी रानी के ही हाथ में था। बड़ी रानी और उसका पुत्र उपेक्षित रूप से उस घर में, छोटी रानी के आश्रित बन कर रह रहे थे। रानी तो समझदार थी, राजा को छोटी रानी के चंगुल में फँसा देखकर उस घर के अन्दर अपना स्थान समझ गई थी, इसलिये घर-गृहस्थी के झगड़ों को छोड़ अपने दिन पूजा-पाठ में व्यतीत करती थी। वह किसी बात में दखल देना या अपने अधिकारों के लिए लड़ना-झगड़ना पसन्द न करती थी। वह बुद्धिमती थी, वह समझती थी, कि जब राजा ने ही छोटी रानी के प्रेम में आसक्त होकर न्याय-अन्याय का विचार करना छोड़ दिया है तो व्यर्थ घर में अशान्ति करने तथा अपने को और अपमानित कराने से क्या फायदा है।
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