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Namvar Vichar Kosh (2 Volume Set)
'नामवर विचार कोश' के प्रकाशन के पूर्व कुछ प्रकाशकों ने इसकी बिक्री के सम्बन्ध में जो आशंका व्यक्त की थी, प्रसन्नता की बात है कि वह पूर्णतः गलत साबित हुई। पहला मुद्रण पूरी तरह समाप्त हो चुका है और इसकी मांग बराबर बनी हुई है। ऐसी स्थिति में पुनर्मुद्रण किया जाना स्वाभाविक है। पहले सोचा था कि अब पुनर्मुद्रण नहीं, दूसरा संस्करण तैयार किया जाना चाहिए जिसमें 'नामवर विचार कोश' के प्रकाशन के बाद प्राप्त साहित्य शामिल किया जाए। ऐसा किया जा सकता तो निश्चित ही 'वह बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य होता और नामवर विचार कोश' की उपयोगिता बढ़ जाती, पर वैसा करना श्रम-साध्य तो होता ही और वैसा करने में काफी समय भी लगता (कम-से-कम दो वर्ष), क्योंकि 'नामवर विचार कोश' में शामिल सभी प्रविष्टियाँ अलग कर नई प्रविष्टियाँ उनमें यथास्थान मिलाई जातीं। बाद में पता चला कि 'नामवर विचार कोश' के प्रकाशन के बाद नामवर जी की इतनी अधिक पुस्तकें मिलीं कि सभी को 'नामवर विचार कोश' में शामिल करना यानी एक ही पुस्तक के रूप में प्रकाशित करना भी सम्भव नहीं होता। अतः तय किया गया कि 'नामवर विचार कोश (भाग-1)' का मूल रूप में पुनर्मुद्रण ही किया जाए और बाद में प्राप्त साहित्य की प्रविष्टियाँ अलग स्वतंत्र रूप में यानी 'नामवर विचार कोश (भाग-2)' के रूप में प्रकाशित की जाएँ।
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