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Ugte Suraj Ki Kiran

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2026
978-9348650948

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चरित्रहीन औरत जब गृहस्वामिनी बनती है, तो सारे कुटुम्ब को जग-हँसाई और अपकीर्ति का दुख झेलना पड़ता है। कुलटा के मुख से निकले अनिष्टकारी अक्षर काँस की तीखी किनारियों-जैसे धारदार होते हैं और हृदय को ऐसे छलनी कर डालते हैं, जैसे कठकीड़ा सदैव बाँस को कोर-कोर खाता है।.... सुमंगला बहू घर-आँगन तुलसी खिलाती है, दीपक जलाती है, मगर अलच्छिनी औरत सदैव अपने घर और वंश के लिए अमंगल के मुहूर्त न्यौता करती है।...

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