
लेखक
Shailesh Matiyani
- 27किताबें
- 5फ़ॉलोअर
- 1,094बार देखा गया
मूल नाम : रमेशचंद्र सिंह मटियानी
जन्म : 14 अक्टूबर, 1931 । बाड़ेछीना गाँव (जनपद–अल्मोड़ा) उत्तराखंड ।
शिक्षा : स्कूली पढ़ाई दसवीं कक्षा तक । अत्यंत निर्धन परिवार में जन्मे शैलेश मटियानी को बचपन से ही तमाम विपदाओं को झेलने के लिए मजबूर होना पड़ा था । शैलेश मटियानी अपने लेखन में समाज के दबे–कुचले, भूखे–नंगों और दलितों–उपेक्षितों पर मार्मिकता से यथार्थ चित्रण किया है । शैलेश मटियानी जी को भारतवर्ष के पहले आंचलिक कथाकार होने का गौरव प्राप्त है । उनके साहित्य में समस्त भारत के जनता का सुख–दुख बसता है ।
पुस्तकें : उपन्यास : ‘बोरीवली से बोरीबंदर तक’, ‘कबूतरखाना’, ‘किस्सा नर्मदाबेन गंगूबाई’, ‘चिट्ठीरसैन’, ‘हौलदार’, ‘चैथी मुट्ठी’, ‘मुख सरोवर के हंस’, ‘एक मूठ सरसों’, ‘पुनर्जन्म के बाद’, ‘कोई अजनबी नहीं’, ‘दो बूँद जल’, ‘भागे हुए लोग’, ‘मंजिल–दर–मंजिल’, ‘उगते सूरज की किरन’,‘माया–सरोवर’, ‘बर्फ गिर चुकने के बाद’, ‘छोटे–छोटे पक्षी’, ‘रामकली’, ‘आकाश कितना अनंत है’, ‘डेरे वाले’, ‘सवित्तरी’, ‘गोपुली–गफूरन’, ‘चंद औरतों का शहर’, ‘बावन नदियों का संगम’, ‘अर्द्धकुम्भ की जात्रा’, ‘मुठभेड़’, ‘टूटे हुए संकल्प’, ‘तिरिया भली ना काठ की’, ‘बारूद और बचुली’, ‘सातवाँ समुंदर’ और ‘दो दुखों का एक सुख’ । कहानी संग्रह: ‘सूखा सागर’, ‘दो दुखों का एक सुख’, ‘सुहागिनी तथा अन्य कहानियाँ’, ‘सफर पर जाने से पहले’, ‘हारा हुआ’, ‘अतीत तथा अन्य कहानियाँ’, ‘तीसरा सुख’, ‘हत्यारे’, ‘पापमुक्ति तथा अन्य कहानियाँ’, ‘बर्फ़ की चट्टानें’, ‘जंगल में मंगल’, ‘महाभोज’, ‘चील’, ‘प्यास और पत्थर’, ‘छिद्दा पहलवान वाली गली’, ‘अहिंसा तथा अन्य कहानियाँ’, ‘माता तथा अन्य कहानियाँ’, ‘नाच जमूरे नाच’, ‘इक्यावन कहानियाँ’, ‘भेड़ें और गड़ेरिये’ और ‘उत्सव के बाद’ । लेखों, निबंधों के संग्रह : ‘जनता और साहित्य’, ‘कागज की नाव’, ‘मुख्य धारा का सवाल’, ‘कभी–कभार’, ‘यदा–कदा’, ‘त्रिज्या’, ‘राष्ट्रभाषा का सवाल’, ‘किसे पता है राष्ट्रीय शर्म का मतलब’, ‘राष्ट्रीयता की चुनौतियाँ’, ‘किसके राम कैसे राम’ । संस्मरण : ‘लेखक की हैसियत से’, ‘मुड़–मुड़ कर मत देख’ ।
पुरस्कार एवं सम्मान : ‘बोरीवली से बोरीबंदर तक’ पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 1960 में पुरस्कार, उत्तर प्रदेश सरकार का संस्थागत सम्मान । 1994 में कुमायूँ विश्वविद्यालय द्वारा ‘डी– लिट्’ (मानद) उपाधि, 1999 में हिन्दी संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा लोहिया सम्मान, 2000 में केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार । फणीश्वरनाथ रेणु पुरस्कार, शारदा सम्मान, साधना सम्मान आदि ।
निधन : 24 अप्रैल, 2001 दिल्ली ।
जन्म : 14 अक्टूबर, 1931 । बाड़ेछीना गाँव (जनपद–अल्मोड़ा) उत्तराखंड ।
शिक्षा : स्कूली पढ़ाई दसवीं कक्षा तक । अत्यंत निर्धन परिवार में जन्मे शैलेश मटियानी को बचपन से ही तमाम विपदाओं को झेलने के लिए मजबूर होना पड़ा था । शैलेश मटियानी अपने लेखन में समाज के दबे–कुचले, भूखे–नंगों और दलितों–उपेक्षितों पर मार्मिकता से यथार्थ चित्रण किया है । शैलेश मटियानी जी को भारतवर्ष के पहले आंचलिक कथाकार होने का गौरव प्राप्त है । उनके साहित्य में समस्त भारत के जनता का सुख–दुख बसता है ।
पुस्तकें : उपन्यास : ‘बोरीवली से बोरीबंदर तक’, ‘कबूतरखाना’, ‘किस्सा नर्मदाबेन गंगूबाई’, ‘चिट्ठीरसैन’, ‘हौलदार’, ‘चैथी मुट्ठी’, ‘मुख सरोवर के हंस’, ‘एक मूठ सरसों’, ‘पुनर्जन्म के बाद’, ‘कोई अजनबी नहीं’, ‘दो बूँद जल’, ‘भागे हुए लोग’, ‘मंजिल–दर–मंजिल’, ‘उगते सूरज की किरन’,‘माया–सरोवर’, ‘बर्फ गिर चुकने के बाद’, ‘छोटे–छोटे पक्षी’, ‘रामकली’, ‘आकाश कितना अनंत है’, ‘डेरे वाले’, ‘सवित्तरी’, ‘गोपुली–गफूरन’, ‘चंद औरतों का शहर’, ‘बावन नदियों का संगम’, ‘अर्द्धकुम्भ की जात्रा’, ‘मुठभेड़’, ‘टूटे हुए संकल्प’, ‘तिरिया भली ना काठ की’, ‘बारूद और बचुली’, ‘सातवाँ समुंदर’ और ‘दो दुखों का एक सुख’ । कहानी संग्रह: ‘सूखा सागर’, ‘दो दुखों का एक सुख’, ‘सुहागिनी तथा अन्य कहानियाँ’, ‘सफर पर जाने से पहले’, ‘हारा हुआ’, ‘अतीत तथा अन्य कहानियाँ’, ‘तीसरा सुख’, ‘हत्यारे’, ‘पापमुक्ति तथा अन्य कहानियाँ’, ‘बर्फ़ की चट्टानें’, ‘जंगल में मंगल’, ‘महाभोज’, ‘चील’, ‘प्यास और पत्थर’, ‘छिद्दा पहलवान वाली गली’, ‘अहिंसा तथा अन्य कहानियाँ’, ‘माता तथा अन्य कहानियाँ’, ‘नाच जमूरे नाच’, ‘इक्यावन कहानियाँ’, ‘भेड़ें और गड़ेरिये’ और ‘उत्सव के बाद’ । लेखों, निबंधों के संग्रह : ‘जनता और साहित्य’, ‘कागज की नाव’, ‘मुख्य धारा का सवाल’, ‘कभी–कभार’, ‘यदा–कदा’, ‘त्रिज्या’, ‘राष्ट्रभाषा का सवाल’, ‘किसे पता है राष्ट्रीय शर्म का मतलब’, ‘राष्ट्रीयता की चुनौतियाँ’, ‘किसके राम कैसे राम’ । संस्मरण : ‘लेखक की हैसियत से’, ‘मुड़–मुड़ कर मत देख’ ।
पुरस्कार एवं सम्मान : ‘बोरीवली से बोरीबंदर तक’ पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 1960 में पुरस्कार, उत्तर प्रदेश सरकार का संस्थागत सम्मान । 1994 में कुमायूँ विश्वविद्यालय द्वारा ‘डी– लिट्’ (मानद) उपाधि, 1999 में हिन्दी संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा लोहिया सम्मान, 2000 में केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार । फणीश्वरनाथ रेणु पुरस्कार, शारदा सम्मान, साधना सम्मान आदि ।
निधन : 24 अप्रैल, 2001 दिल्ली ।
Shailesh Matiyani की किताबें
₹120 से शुरू, हर किताब पर 20% छूट
इस खोज में कोई किताब नहीं मिलीदूसरा शब्द या दाम चुनकर देखें।
आपकी पसंद के आधार पर
आपके लिए चुनी गई किताबें
इस डिवाइस पर आपकी देखी गई किताबों के आधार पर
किताब नहीं मिल रही?
किताब और लेखक का नाम बताइए, हम बताएँगे कि क्या हम उसे आपके लिए मँगवा सकते हैं।
हमारा पूरा सूची-पत्र
हमारी सभी किताबें एक सूची में। पुस्तकालयों, स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं के लिए उपयोगी।