• New product

Kabootarkhana

(0.00) 0 Review(s) 
2026
9788168653436

Select Book Type

Earn 3 reward points on purchase of this book.
In stock

किताब से कुछ अंश मेसर्स सेठ बालजी, लालजी 'फाउण्डर ऑफ गाठिया एण्ड पापड़ी इन बॉम्बे! के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त हैं! बम्बई के हर मशहूर नाके पर उनका एक होटल अवश्य है, जहाँ की विशेष चीजें गाठिया-पापड़ी और भजीया हैं! गाठिया-पापड़ी-भजीया और भेल- गुर्जरों की रसवन्ती जीभ इन्हीं 'चारों धाम' की तीर्थ यात्रा के लिए विकल-विह्वल रहती है। भेल गुजराती-पारसी जनों की सर्वाधिक प्रिय वस्तु है। गाँडा भेल वालों की दुकानें इन्हीं की बदौलत रोशन रहती हैं। भेल में इतनी चीजें चाहिए- कुरमुरा, चिबड़ा, सेव, पूड़ी, आलू-प्याज और तीन-चार किसम की चटनियाँ - ! गाँडा भेल के अनन्य प्रेमी सेठ बालजी के एकमात्र पुत्र सेठ लालजी का निर्माण भी भेल की तरह हुआ था, शायद ! पल्लव, चोल, शाक्य, कम्बोज, चौहान, राठौड़ और शेख-सैय्यदों के रक्ताणु लालजी के शरीर तक चले आए हैं, पिछले हजार पाँच सौ वर्षों के इतिहास और वेश-क्रम में, ऐसी बात सेठ बालजी श्रीमती बालजी से कभी-कभी कहा करते थे ! इन सबके रक्ताणु सेठ लालजी के शरीर में पाए जा सकते हैं या नहीं, श्रीमती बालजी को कुछ जानकारी या सरोकार नहीं, पर उनके घर दूध की बाल्टी लाने वाले भैय्या जी, जिला खैराबाद वाले के वीर्य से लालजी का निर्माण हुआ है-सेठ बालजी के 'रक्ताणुओं' से नहीं-इतना श्रीमती बालजी खूब जानती हैं!

You might also like

Reviews

No Reviews found.