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Bela Hui Aber

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2026
9788168653450

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किताब से लिए कुछ अंश हेर! वेला हुई अबेर, शंख बजे, दीप जले, शीश झुके, गात खिले, देवता मेरे महाबली, कि तेरे दर्शन को प्यासी आँखें हुई चौफेर, कि पुण्य फले, भागे जागे हमारे, ठाकुर बाबा! कि-क्यान्-कुटुड़ि... घि-घ्यान्-कुटुड़ि'... महाबली ! भरपूर-भंडारी साहूकार भक्त के चौकुनिया (चतुष्कोण) पटांगण के पावन पथरौटों में देवराजा मेरे महाबली हरू का दूर्वांचली-आसन जो लग गया, कि आँखों का उघड़ना सफल हुआ, कि गात गद्गद, पिण्ड पवित्र हुआ, मेरे स्वामी, कि तेरे कुसुमिया-चरणों में हमारे नौलाख नमोनारायणों की ढेर ! घिन्-घ्यानाकुटी-घिन्-घ्यानाकुटी-घिनान्... किन्-क्यानाकुटी-किन्-क्यानाकुटी-किनान्.. जाग, मेरे आसनधारी देवता !

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