Anil Vibhakar

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About Anil Vibhakar

अनिल विभाकर नौवें दशक के महत्वपूर्ण कवि हैं। लोकतंत्र और आजादी के इस पहरुआ कवि का जन्म 5 जून 1954 को विहार के पुराने गया जनपद, वर्तमान में नवादा जिले के परीरिया गीव में हुआ। प्रारम्भिक से लेकर मैट्रिक तक की शिक्षा गांव में ग्रहण की। इसके बाद मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के अंगीभूत गया कालेज से बीए ऑनर्स किया। चार दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता और निरंतर लेखन कर रहे विभाकर सच कहने के आदी और स्मृतिलब्ध कवि हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने के बाद पटना से प्रकाशित हिन्दी दैनिक 'आज' में 1983 से तीन अनिल विभाकर साल तक वरिष्ठ उपसंपादक के पद पर कार्यरत रहे। इसके बाद वीस वर्षों तक' हिन्दुस्तान' के पटना संस्करण में फीचर संपादक और अन्य वरिष्ठ संपादकीय पदों पर अपनी सेवाएं दीं। दैनिक' हिन्दुस्तान' छोड़ने के बाद 'जनसत्ता' के रायपुर संस्करण के सात साल तक स्थानीय संपादक रहे। चार साल तक' नवभारत' के भुवनेश्वर (ओडिशा) संस्करण के स्थानीय संपादक रहे। तत्पश्चात तीन वर्ष तक दैनिक' देशप्राण' के पटना संस्करण के स्थानीय संपादक पद पर अपनी सेवाएं दीं।
प्रकाशन/प्रसारण: कविता संग्रह 'शिखर में आग', 'सच कहने के लिए', 'अंतरिक्षसुता' ।
देश की सभी महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं, लेख, रिपोर्ताज और समीक्षाएं प्रकाशित और प्रशंसित । इसके अलावा कई महत्वपूर्ण काव्यसंग्रहों में कविताएं सम्मिलित । दूरदर्शन और आकाशवाणी से कविताएं प्रसारित होती रही हैं और इन्होंने इनके महत्वपूर्ण राष्ट्रीय साहित्यिक आयोजनों में भी शिरकत की।
पुरस्कार/ सम्मान : हिन्दी कविता में विशिष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित 'बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान', गया जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन का 'वागीश्वरी सम्मान', साहित्यकार संसद की ओर से 1998 में 'रामधारी सिंह दिनकर राष्ट्रीय शिखर साहित्य पुरस्कार' । पत्रकारिता में विशिष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित 'ब्रजकिशोर सम्मान' । 'जनपथ न्यूज टुडे' की ओर से चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य सम्मान ।
विशेष : विश्वप्रसिद्ध खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी बोर्ड के भारत सरकार की ओर से सदस्य हैं।

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