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Dr. Sunil Gulabsingh Jadhav
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डॉ. सुनील गुलाबसिंग जाधव का जन्म 1 सितम्बर, 1978 में अपने ननिहाल जिला नांदेड के तहसील मुदखेड में हुआ । आपकी प्राथमिक शिक्षा हादगांव तो माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक कॉस्मोपालीटन, स्नातक शिक्षा सरस्वती विद्या मंदिर महाविद्यालय, किनवट में हुई । एम. ए. हिंदी में नांदेड के पीपल्स कॉलेज से तो पीएचडी की उपाधि स्वामी रामानंद तीर्थ विश्वविद्यालय से प्राप्त की । यू.जी.सी. से प्राध्यापक पात्रता परीक्षा नेट ।
प्रकाशन : कविता संकलन : मैं बंजारा हूँ, सच बोलने की भूल, मेरे भीतर मैं, रौशनी की ओर बढ़ते कदम, त्रिधारा । कहानी संकलन : मैं भी इंसान हूँ, एक कहानी ऐसी भी, गोधड़ी । एकांकी : भ्रूण, कैची और बंदूक, 3–एक निष्ठावान सैनिक । एकांकी संकलन : अमरबेल और अन्य एकांकी, नाटक–तालाबंदी के वे दिन अनुवाद : सच का एक टुकड़ा (नाटक) समीक्षा/आलोचना : नागार्जुन के काव्य में व्यंग्य, हिंदी साहित्य विविध आयाम, दलित साहित्य विविध आयाम, अंतरजाल की दुनिया ।
पुरस्कार : अतराष्ट्रीय सृजन श्री पुरस्कार, उज्बेकिस्तान, (२०१२), अंतरराष्ट्रीय सृजन श्री पुरस्कार, दुबई, (२०१२), भाषा रत्न, दिल्ली, (२०१३), अतराष्ट्रीय प्रमोद वर्मा सम्मान, कम्बोडिया, (२०१३), विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरशियस द्वारा २०१३ का ‘मैं वर्ण और वर्णनातीत’ कविता को अंतरराष्ट्रीय प्रथम पुरस्कार, राष्ट्र भाषा गौरव इलाहाबाद, हिंदी मित्र–उदयपुर (२०१९), लघुकथा सम्मान, बीकानेर (२०१९), युगधारा–उदयपुर (२०१९), विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरशियस द्वारा २०१३ का ‘कैंची और बंदूक’ एकांकी को अंतरराष्ट्रीय तृतीय पुरस्कार, हिंदी मिलाप–हैदराबाद (राष्ट्रीय कविता प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार), (२०१९), अमरबेल एकांकी के लिए रचनाकार नाटक लेखन पुरस्कार, (२०२०), मुंशी प्रेमचन्द महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार, (२०२१–२२) (‘गोधड़ी’ कहानी संकलन के लिए) अन्य 20 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार ।
सम्प्रति : हिंदी विभाग, यशवंत महाविद्यालय, नांदेड
सम्पर्क : महाराणा प्रताप हाउसिंग सोसाइटी, हनुमान गढ़ कमान के सामने,
प्रकाशन : कविता संकलन : मैं बंजारा हूँ, सच बोलने की भूल, मेरे भीतर मैं, रौशनी की ओर बढ़ते कदम, त्रिधारा । कहानी संकलन : मैं भी इंसान हूँ, एक कहानी ऐसी भी, गोधड़ी । एकांकी : भ्रूण, कैची और बंदूक, 3–एक निष्ठावान सैनिक । एकांकी संकलन : अमरबेल और अन्य एकांकी, नाटक–तालाबंदी के वे दिन अनुवाद : सच का एक टुकड़ा (नाटक) समीक्षा/आलोचना : नागार्जुन के काव्य में व्यंग्य, हिंदी साहित्य विविध आयाम, दलित साहित्य विविध आयाम, अंतरजाल की दुनिया ।
पुरस्कार : अतराष्ट्रीय सृजन श्री पुरस्कार, उज्बेकिस्तान, (२०१२), अंतरराष्ट्रीय सृजन श्री पुरस्कार, दुबई, (२०१२), भाषा रत्न, दिल्ली, (२०१३), अतराष्ट्रीय प्रमोद वर्मा सम्मान, कम्बोडिया, (२०१३), विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरशियस द्वारा २०१३ का ‘मैं वर्ण और वर्णनातीत’ कविता को अंतरराष्ट्रीय प्रथम पुरस्कार, राष्ट्र भाषा गौरव इलाहाबाद, हिंदी मित्र–उदयपुर (२०१९), लघुकथा सम्मान, बीकानेर (२०१९), युगधारा–उदयपुर (२०१९), विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरशियस द्वारा २०१३ का ‘कैंची और बंदूक’ एकांकी को अंतरराष्ट्रीय तृतीय पुरस्कार, हिंदी मिलाप–हैदराबाद (राष्ट्रीय कविता प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार), (२०१९), अमरबेल एकांकी के लिए रचनाकार नाटक लेखन पुरस्कार, (२०२०), मुंशी प्रेमचन्द महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार, (२०२१–२२) (‘गोधड़ी’ कहानी संकलन के लिए) अन्य 20 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार ।
सम्प्रति : हिंदी विभाग, यशवंत महाविद्यालय, नांदेड
सम्पर्क : महाराणा प्रताप हाउसिंग सोसाइटी, हनुमान गढ़ कमान के सामने,
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