Gunjan Agrawal
About Gunjan Agrawal
छब्बीस नवम्बर 1984 को ग्राम पो. जरीडीह बाज़ार (जिला बोकारो, झारखण्ड) में जन्मे गुंजन अग्रवाल समकालीन हिंदी जगत् के उन सक्रिय लेखक, इतिहास-अन्वेषक, सम्पादक और शोधकर्ताओं में हैं जिन्होंने इतिहास, संस्कृति, राष्ट्रचेतना तथा सार्वजनिक जीवन के विविध आयामों को अपने अध्ययन और लेखन का विषय बनाया है। दो दशकों से अधिक समय से निरन्तर लेखन, सम्पादन, शोध और प्रकाशन-कार्य में संलग्न गुंजन अग्रवाल ने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के प्रामाणिक अध्ययन को लोकप्रिय और जनोपयोगी बनाने का उल्लेखनीय प्रयास किया है। इतिहास एवं पुरातत्त्व, भारतीय संस्कृति, धर्म, दर्शन और राष्ट्रीय पुनर्जागरण से सम्बन्धित विषयों पर उनके शताधिक शोध निबन्ध और लेख, देश की लब्धप्रतिष्ठ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
गुंजन अग्रवाल के साहित्यिक जीवन का प्रारम्भ वर्ष 2004 में हुआ और तब से उन्होंने शोधपरक लेखन की एक सशक्त परम्परा विकसित की है। उनकी प्रकाशित मौलिक पुस्तकों में 'हिंदू इतिहास की स्मरणीय तिथियाँ', 'भगवान् बुद्ध और उनकी इतिहाससम्मत तिथि', 'महाराजा हेमचन्द्र विक्रमादित्य : एक विस्मृत अग्रदूत', 'सांस्कृतिक जागरण का महापर्व कुम्भ',' अतीत से वर्तमान की आध्यात्मिक यात्रा के साक्षी कुम्भ-मेले', 'प्रयागराज : एक जीवन्त सांस्कृतिक नगर', 'महामना मालवीय वाड्मय दिशा-दर्शन', 'भारतमाता : चित्रकला, स्थापत्य एवं साहित्य में अभिव्यक्त भारतीय राष्ट्रवाद' तथा 'बिहार में महामना' जैसी कृतियाँ सम्मिलित हैं।
एक कुशल सम्पादक के रूप में भी उनका योगदान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण रहा है। उन्होंने अनेक पत्र-पत्रिकाओं तथा पुस्तकों का सम्पादन किया है। विशेष रूप से भारत सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित 23-खण्डीय 'पण्डित मदनमोहन मालवीय सम्पूर्ण वाङ्मय' परियोजना में वरिष्ठ शोध-सहायक एवं सम्पादक मण्डल सदस्य के रूप में उनका कार्य उल्लेखनीय है। इस परियोजना के अंतर्गत उन्होंने देश-विदेश के अभिलेखागारों से दुर्लभ दस्तावेज़ों के अन्वेषण, सत्यापन और पाठ-निर्धारण का महत्त्वपूर्ण दायित्व निभाया।
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