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10 Mahan Krantikari

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2026
9789382553236

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कभी भारत सोने की चिड़िया कहलाता था, लेकिन कालांतर में विदेशी आक्रांताओं के आक्रमण और फिर तानाशाही के कारण इसे पराधीनता का दंश भी झेलना पड़ा। परंतु भारतीयों ने इस पराधीनता से मुक्ति पाने के लिए हमेशा प्रयत्न किए और अंततः अपनी स्वतंत्रता को पा ही लिया। लेकिन स्वतंत्रता पाने के लिए न जाने कितने क्रांतिकारियों ने बलिदान दिए। ऐसे अनेकों क्रांतिकारी हैं, जिनके बारे में हम अनभिज्ञ हैं या बहुत कम जानते हैं। भारत की आजादी के लिए मुस्लिम काल से लेकर 1947 तक जितने भी प्रयत्न हुए, उनमें स्वतंत्रता का सपना संजोये क्रान्तिकारियों और शहीदों की उपस्थित सबसे अधिक प्रेरणादायी सिद्ध हुई। वस्तुतः भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग है। भारत की धरती के प्रति जितनी भक्ति और मातृ-भावना उस युग में थी, उतनी कभी नहीं रही। मातृभूमि की सेवा और उसके लिए मर-मिटने की जो भावना उस समय थी, आज उसका नितांत अभाव हो गया है। क्रांतिकारी आंदोलन का समय सामान्यतः लोगों ने सन् 1857 से 1942 तक माना है। श्रीकृष्ण सरल का मत है कि इसका समय सन् 1757 अर्थात् प्लासी के युद्ध से सन् 1961 अर्थात् गोवा मुक्ति तक मानना चाहिए। सन् 1961 में गोवा मुक्ति के साथ ही भारतवर्ष पूर्ण रूप से स्वाधीन हो सका है। कई इतिहासकार ऐसा भी मानते हैं कि यवन काल में भी अनेक क्रांतिकारी हुए, जिन्हें उस समय विद्रोही कहा गया और मुस्लिम शासन द्वारा सरेआम फांसी के फंदों पर झुलाया गया।

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