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Bihar Ke Paryavaran Stambh
बिहार की वसुंधरा केवल इतिहास, दर्शन और संस्कृति की महाभूमि नहीं रही है, बल्कि यह मानवता, करुणा, दया एवं प्रकृति-सम्मत जीवन-दृष्टि की भी आदिकालीन से वाहक रही है। भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की अहिंसा एवं सह-अस्तित्व की शिक्षाओं से लेकर सम्म्राट अशोक द्वारा पशु-पक्षियों के संरक्षण हेतु उठाए गए ऐतिहासिक कदम तक, बिहार ने सदैव प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में विश्व को मार्गदर्शन दिया है। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव-विविधता के क्षरण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब "बिहार के पर्यावरण स्तंभ" जैसी पुस्तक अत्यंत प्रासंगिक और प्रेरणास्पद प्रतीत होती है। यह पुस्तक केवल 35 पर्यावरणविदों की जीवनी का संकलन नहीं है, बल्कि यह उन व्यक्तित्वों के संघर्ष, संवेदनशीलता, समर्पण और दूरदर्शिता का जीवंत उदाहरण है, जिन्होंने अपने जीवन को प्रकृति संरक्षण के महान उद्देश्य के लिए समर्पित किया है। इनमें वैज्ञानिक, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण साहित्यकार एवं साधारण लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने असाधारण कार्यों से समाज को नई दिशा दी। इन सभी ने यह सिद्ध किया है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि जन-जागरण और सामाजिक उत्तरदायित्व का आंदोलन है। अदिति रॉय, निशांत रंजन एवं अमित कुमार पाण्डेय ने अत्यंत श्रम, शोध और संवेदनशीलता के साथ इन प्रेरणादायक व्यक्तित्वों के कार्यों को एक सूत्र में पिरोने का सराहनीय प्रयास किया है। यह पुस्तक न केवल वर्तमान पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बनेगी।
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