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Tapti Dharti : Badalta Mausam Aur Bharat
जिस तरह से 'विकास' एक नई अवधारणा है-वैश्वीकरण के बाद, मानवीय सहअस्तित्व की भावना से परे, पूँजी के प्रभुत्व से उपजी अवधारणा ठीक उसी तरह पर्यावरण संरक्षण भी एक नए जमाने की समस्या है। वास्तव में पर्यावरण एक एकीकृत शब्द है जिसमें सूर्य-चंद्र, आकाश-पृथ्वी, जल-वायु के साथ-साथ इंसान व जीव सभी कुछ शामिल हैं। ये सभी एक साथ सुखद परिवेश में अपना निर्धारित जीवन संपन्न करें, यही पर्यावरण है। सनद रहे विकास एक सापेक्षिक अवधारणा है और समानार्थी प्रतीत होने के बावजूद इसके मायने 'प्रगति' से भिन्न हैं। विकास, प्रगति का उत्प्रेरक तत्व है, लेकिन इसका मूल महज आर्थिक तत्व नहीं है, बल्कि गुणात्मक उन्नति है। सभी के जीवन में सकारात्मक बदलाव। मुल्क के हर बाशिंदे-चाहे वह इंसान हो या फिर जीव-जंतु, साफ हवा मिले साँस लेने के लिए, नदी-तालाब, समुद्र स्वच्छ हो, लाखों-लाख किस्म के पेड़-पौधे, कीट-पतंगे, जानवर-पक्षी उन्मुक्त हो कर अपने नैसर्गिक स्वरूप में जीवन यापन कर रहे हों-ऐसा विकास ही जन भावनाओं की संकल्पना होता है। विडंबना है कि भौतिक सुख की बढ़ती लालसा और कथित विकास की अवधारणा ने एक भयानक समस्या को उपजाया और फिर उसके निराकरण के नाम पर अपनी सारी ऊर्जा, संचय शक्ति व धन व्यय कर रहा है।
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