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Bihar Ke Samrat
'बिहार के सम्राट' पुस्तक केवल संभावनाओं और उपलब्धियों का पुलिंदा नहीं है, बल्कि यह सरकार और नेतृत्व के सामने खड़ी विशाल चुनौतियों का भी एक निष्पक्ष आईना है। लेखक रमाकांत चंदन ने बहुत ही बेबाकी से उन क्षेत्रों की ओर इशारा किया है जहाँ सरकार को कसौटी पर कसा जाएगा। बिहार के सरकारी स्कूलों में गिरता पढ़ाई का स्तर, शिक्षकों और बुनियादी ढांचे की कमी, और ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली को सुधारे बिना किसी भी सुशासन का दावा अधूरा रहेगा। बिहार की नौकरशाही अपनी जटिलताओं और सुस्ती के लिए जानी जाती है, ऐसे में नए नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस नौकरशाही से काम लेने और योजनाओं को धरातल पर समयबद्ध तरीके से उतारने की होगी। पुस्तक में यह भी रेखांकित किया गया है कि सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद सम्राट हैं। उन्हें एक आक्रामक नेता की अपनी व्यक्तिगत छवि से बाहर निकलकर पूरी प्रशासनिक टीम और राजनीतिक सहयोगियों को साथ लेकर एक परफॉर्मर के रूप में खुद को साबित करना होगा, तथा जाति और क्षेत्र की संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर सर्वसमावेशी विकास का प्रतीक बनना होगा... रमाकांत चंदन की यह कृति 'बिहार के सम्राट' बिहार के वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य को समझने के लिए एक अनिवार्य दस्तावेज है। यह पुस्तक पाठकों को दैनिक राजनीतिक विमर्श के सतहीपन से निकालकर नीतिगत सच्चाइयों और गहरे राजनीतिक विश्लेषण की ओर ले जाती है।
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