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Sahitya Sarthi
पाञ्चाल क्षेत्र अर्थात् जनपद फर्रुखाबाद की साहित्यिक, सांस्कृतिक विरासत अद्वि तीय है। महीयसी महादेवी वर्मा ने इस भूमि पर जन्म लेकर जनपदवासियों को न केवल गौरवान्वित किया है, अपितु समस्त मनीषियों को एक दिशा प्रदान की है। सहित्य चेतना जनपद फर्रुखाबाद की मिट्टी में हैं। यहाँ अनेक साहित्यकारों ने जन्म लिया, जिनमें कुछ प्रकाश में आए, तो कुछ अप्रकाशित ही रह गए। कलम के समस्त साधकों को विस्तारित होने हेतु जब आवश्यक प्रकाश व जल प्राप्त नहीं हो पाता और न जाने कितने अनमोल साधक अपनी विभिन्न आर्थिक, पारिवारिक व सामाजिक परिस्थितियों के कारण साहित्य साधना को बीच में ही छोड़कर परिस्थितियों के कुचक्र में फँस कर किसी और राह पर चल पड़ते हैं। एक बड़े साहित्यकार के ब्रह्मलीन होने के पश्चात् उनकी कुछ रचनाएँ मेरे हाथ लगी, उनको पढ़कर मेरे मन में उनके बारे में और अधिक जानने की प्रबल उत्कंठा उत्पन्न हुई, तो मैं ऐसे कई महानुभावों से मिली जो उनके [साहित्यकार का नाम लिखना मैं यहाँ आवश्यक नहीं समझती] बहुत नजदीकी लोगों को या यूँ लिखूँ कि उनका आज का व्यक्तित्व उन्हीं अनाम साहित्यकार के द्वारा गढ़ा गया है तो अतिशयोक्ति न होगी, वे भी उनके बारे में सामान्य जानकारी के अतिरिक्त कुछ बता न पाए। यह बात मेरे मन को व्यथित कर गई। संसार से गमन के पश्चात् लोग इतनी जल्दी सब कुछ विस्मृत कर देते हैं आश्चर्य भी हुआ। उन दिनों जो हृदय में उथल-पुथल चली उसी ने 'साहित्य सारथी' कृति को जन्म दिया।
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