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Yugpurush : Dr. Bhimrao Ambedkar
नवभारत के राष्ट्र निर्माता जितने भी हुए हैं, उन सबने कड़ा संघर्ष किया है। इन्हीं में से एक नाम है डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर, जिन्होंने न जाने कैसी-कैसी मुसीबतों को अपनी दृढ़ इच्छा के बल पर किनारे लगाया और पढ़ाई करने के लिए वह किसी तरह से स्कूल पहुँचा। मगर उसे क्लास में बैठने ही नहीं दिया गया। काफी जद्दोजहद के बाद जब जगह मिली तो सबसे पीछे मिली। इस दौरान जब उसे प्यास लगती तो उसे पानी का सार्वजनिक घड़ा छूने और पानी पीने से भी रोका जाता। उसके पीने के लिए घड़ा अलग था। यह घड़ा यूँ ही अलग नहीं था, बल्कि उसके जैसे बच्चों को यह घड़ा एहसास कराता था कि वह ऐसी जाति से हैं, जिसे लोग नीच और अछूत कहकर अपमानित करते थे। यूँ तो दबे-कुचले लोगों को अपमान सहने की आदत पड़ जाती है, लेकिन कोई बिरला ऐसा भी होता है कि उसे अन्याय पसंद नहीं आता और यह अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने की ठान लेता है। डॉ. भीमराव रामजी ऐसे ही महान व्यक्तित्व के धनी थे कि उन्होंने इन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ न केवल आवाज उठाई, वरन भारत से इन सब बुराइयों को मिटाकर रख दिया और एक नए इतिहास का नव निर्माण किया और भारतीय संस्कृति एवं धर्म को भी नई दिशा प्रदान की। डॉ. आंबेडकर की यह जीवनगाथा प्रामाणिक तथ्यों के आधार पर लिखी गई है, ताकि बालकों, किशोरों और युवा पाठकों के साथ-साथ बुजुर्गों व इतिहास के शोधार्थियों के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो सके।
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