• New product

Bagri Geet Gagar

(0.00) 0 Review(s) 
0
9789347029257

Select Book Type

Earn 9 reward points on purchase of this book.
In stock

गीत का संबंध मानवीय जीवन और भावनाओं से होता है। मानव जिस प्रकार के परिवेश में रहता है उसकी जीवन शैली उसी प्रकार विकसित होती है और जीवन शैली के अनुरूप ही गीतों का सृजन होता है। गीत अनायास प्रकट नहीं होते अपितु गीतों के सृजन में परिवेश में निहित संवेदनाओं का प्रवाह और संस्कृति का आलोक मिलकर व्यक्ति को गीत सृजन हेतु विह्वल करते हैं। इसी प्रकार का भाव लोकगीतों के सृजन का आधार है। लोक गीतों के रचियता लोक मानस में निहित ज्ञान और भाव का सामंजस्य है, जो समूह के रूप में अभिव्यंजित होता है। भारत में प्रत्येक क्षेत्र की लोक संस्कृति में गीतों की समृद्ध विरासत उपलब्ध है, जिसके मुख्य स्रोत संस्कृति और मानव मूल्य हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी इन गीतों के माध्यम से रूपांतरित होते रहते हैं। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान का संगम स्थल बागड़ी बोली क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। बागड़ी बोली मूलतः राजस्थानी भाषा परिवार की बोली है, जो मारवाड़ी का उपरूप है तथा शेखावाटी से मिलती जुलती है। इस बोली पर जहाँ एक ओर हरियाणवी का प्रचुर प्रभाव है वहीं दूसरी ओर मलवई पंजाबी बोली का प्रभाव और समरसता सहज ही देखी जा सकती है। राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ के साथ-साथ चुरू तथा बीकानेर के अंचलों तक विस्तारित यह बोली हरियाणा के सिरसा और फतेहाबाद के साथ-साथ हिसार के सीमावर्ती अंचलों में बोली जाती है।

You might also like

Reviews

No Reviews found.