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Baudh Dharm - Darshan
भगवान बुद्ध के धम्म (धर्म) में नैतिक मूल्यों, उच्च आदर्शों का समावेश होने के कारण वे बौद्ध धर्म से बहुत अधिक प्रभावित हुए। परिणामस्वरूप उनके भीतर चिंतन की धारा उभरी। बौद्ध धम्म पर गंभीरता से अध्ययन और शोध उन्होंने किया। तभी तो विश्व में बौद्ध धर्म-दर्शन उनका अद्वितीय ग्रन्थ माना जाता है। 'अभिधर्म कोष' (वसुबन्धु विरचित) जो भारत में उपलब्ध नहीं था, उसका अनुवाद भी आचार्य जी ने फ्रेंच से हिन्दी और अंग्रेजी में किया। यह अनुवाद कार्य उन्होंने अहमद नगर जेल में रहते हुए किया। राहुल सांकृत्यायन की तरह जेल उनके लिए भी एक लेखनशाला थी। वसुबन्धु का प्रसिद्ध ग्रन्थ 'त्रिशिंका' का भी हिन्दी में अनुवाद किया। वे पालि भाषा का व्याकरण एवं बौद्ध धर्म के पारिभाषिक शब्दकोश की कमी को भी दूर करना चाहते थे लेकिन समयाभाव के कारण न कर सके। उन्होंने केवल बौद्ध धर्म के ग्रन्थ ही नहीं लिखे बल्कि देशभक्ति, राष्ट्रीयता, समाजवाद आदि पर भी ग्रन्थ लिखे हैं। आचार्य नरेन्द्र जी केवल बौद्ध धर्म एवं उसके साहित्य में ही रुचि नहीं रखते थे, बल्कि उस समय भारत की स्वतंत्रता के लिए चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन में भी रुचि रखते थे।
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