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Bhagat Singh Ke Bahane

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2025
9789348650764

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भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन में गांधी के असहयोग के बाद एक ऐसा दौर आया जब विचार की आधारभूमि वहाँ अधिक उर्वरा दिखाई देने लगी। उत्तर भारत में उन दिनों बंगाल के 'अनुशीलन' और 'युगांतर' दल कार्य कर रहे थे, पर उनका स्वरूप अखिल भारतीय नहीं था। ऐसे में 'हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ' का गठन एक ऐतिहासिक घटना थी। क्रांतिकारी दल ने खुली आंखों तब अपने संविधान 'पीला पर्चा' की रचना की और संगठन के फैलाव के लिए व्यापक योजनाएँ बनाईं। इस पर्चे में लिखा गया या कि क्रांतिकारी ऐसे समाज की रचना के लिए प्रयत्नशील हैं, जिसमें एक मनुष्य के द्वारा दूसरे मनुष्य का तथा एक राष्ट्र के द्वारा दूसरे राष्ट्र का शोषण संभव नहीं होगा। इस अभियान में क्रांतिकारी दल के नेता योगेशचन्द्र चटर्जी और शचीन्द्रनाथ तान्यात के अलावा रामप्रसाद बिस्मिल भी थे, जिन्हें 'मैनपुरी षड्यंत्र केस' में हिस्सेदारी और उसमें फरारी-जीवन का विशेष अनुभव था। दल के गठन के बाद 9 अगस्त, 1925 को सरकारी खजाने को लूटने के लिए 'काकोरी कांड' की योजना कार्यान्वित की गई, जिसका स्वतंत्रता आंदोलन पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ा। यह ब्रिटिश हुकूमत के लिए बड़ा धक्का था। इसमें पकड़े गए चार बड़े क्रांतिकारी-रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खाँ, रोशनसिंह और राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी 1927 में फाँसी चढ़ा दिए गए। पर इससे पहले इस मामले में गिरफ्तार दल के नेतृत्वकर्ता विस्मिल को जेल ते छुड़ाने की गुप्त योजना से भगतसिंह भी जुड़े जिसमें सफलता नहीं मिली।

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