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Bhartendu Mandal

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2026
9789347602436

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भारतेन्दु और उनके साथ के रचनाकारों ने एक ऐसी नींव रखी, जिस पर आज की आ/ाुनिक हिन्दी का विशाल महल खड़ा हुआ । उस उर्वर जमीन से विवि/ा विधाओं की ऐसी अनेक वीथिकाएँ निकली जिस पर आज अनेक महान् रचनाकारों के पद–चिह्नों के अमिट निशान हैं । आज इस कारवाँ से निकलकर अनेक नाम विश्व भाषाओं में अपनी पहचान बना रहे हैं । यह विरासत जितना मूल्यवान है उतना ही जरूरी है कि हम इसे समय–समय पर उटकेरते रहें । जब–जब हमारे पाँव डगमगाये, हम मौजूदा समय में जब भी संकट महसूस करें, हमें अपनी विरासत के पास जाना चाहिए । हमें उन गवाक्षों को ढूँढ़ना चाहिए, जिसके सहारे हमारी मौजूदा उलझनों को सुलझाने में सहूलियत मिल सके इसीलिए उसकी बार–बार प्रस्तुति की प्रासंगिकता हमेशा बनी रहती है । बाबू ब्रजरत्न दास का ‘भारतेन्दु–मंडल’ उस विरासत की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है ।

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