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Bhartiya Va Pashchatya Sahitya Evam Sabhyata Ke Antarsutra

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2026
9789347029127

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क्या साहित्य केवल शब्दों का विन्यास है, या वह मनुष्य की सभ्यता, संस्कृति और संवेदनाओं की गहनतम अभिव्यक्ति भी है? "भारतीय एवं पाश्चात्य साहित्य एवं सभ्यता के अंतसूत्र" इसी प्रश्न की खोज में निकली एक ऐसी बौद्धिक और भावनात्मक यात्रा है, जो समय, समाज और संस्कृतियों की सीमाओं को लाँघते हुए मनुष्य की साझा चेतना तक पहुँचने का प्रयास करती है। यह कृति भारतीय और पाश्चात्य साहित्यिक परंपराओं के मध्य उन सूक्ष्म सूत्रों को पहचानने का प्रयास करती है, जो भिन्नताओं के भीतर छिपी हुई एक अदृश्य एकता का संकेत देते हैं। इस प्रकार भारतीय एवं पाश्चात्य साहित्य के अंतर संबंध केवल साहित्यिक अंतर संबंध ही नहीं बल्कि विचारों के सवस्थ संवाद एवं विचारों का स्वस्थ्य आदान-प्रदान भी है। शायद कि भौगोलिक भूखंडों के परिवर्तन से मानवीय संवेदनाओं में परिवर्तन नहीं होता है, अतः मनुष्य की संवेदनाओ की अंर्तयात्रा पाश्चात्य एवं भारतीय दोनों ही भौगोलिक सीमाओं पर एक समान मिलती है भले ही उसके रूप अपनी शैली में अलग-अलग हों।

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