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Brahmand Mein Plasma

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2026
9788199759633

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हमारे निकट प्लाज्मा का सबसे बड़ा एवं नैसर्गिक स्रोत सूर्य है। सूर्य एक गैस की विशाल गेंद है जो अपने ही गुरुत्व से जुड़ी हुई है। सूर्य के अत्यधिक तापमान के कारण सौर गैसें अधिकतर आयनित हो चुकी हैं एवं प्लाज्मा के स्वरूप में है। सूर्य के कोर में प्लाज्मा घनत्व एवं प्लाज़्मा तापमान में बहुत अधिक होता है। कोरोना की तुलना में प्रकाशमंडल में प्लाज़्मा घनत्व बहुत अधिक होता है जबकि प्लाज़्मा तापमान लगभग 1000 गुना कम होता है। सौर विकिरण सूर्य की सबसे बाहरी सतह "प्रकाशमण्डल" से आता है। सौर गैसें बहुत अधिक तापमान के साथ प्रकाशमंडल से काफी बाहर की ओर फैली हैं और "सौर प्रभामंडल" बनाती हैं। यह प्रभामंडल इतना गरम होता है कि बहुत से प्रभामंडलीय कणों की बाहर की ओर गति का परिमाण सूर्य के पलायन गुरुत्व की गति से भी अधिक हो जाता है जो एक धारा (सौर पवन) बनाते हुए सूर्य से बाहर निकाल जाते हैं। सूर्य का चुम्बकीय क्षेत्र अति परिवर्ती है जो सौर-पवन एवं अंतरग्रहीय अंतराल में उसके साथ जाते चुम्बकीय क्षेत्र को भी समीष्टि एवं समय में अति परिवर्ती बना देता है। पृथ्वी के निकट सूर्य सबसे विशिष्ट प्राकृतिक प्लाज़्मा तंत्र है। सूर्य-पृथ्वी तंत्र में सम्मिलित निकाय हैं सूर्य तथा उसका प्रभामंडल, अंतरग्रहीय अंतराल व पृथ्वी। सूर्य के प्लाज्मा वातावरण एवं अंतरग्रहीय चुम्बकीय क्षेत्र का पृथ्वी के चारों ओर के अन्तरिक्ष मौसम पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

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