• New product

Brihat Vichar Kosh (Khand 1-2)

(0.00) 0 Review(s) 
2026
9789347602344

Select Book Type

Earn 45 reward points on purchase of this book.
In stock

संपादित कोश विश्व के सुप्रसिद्ध चिंतकों, दार्शनिकों, विद्वानों, साहित्यकारों, लेखकों, ग्रन्यों आदि के विचारों/ संदेशों का संग्रह है। दुनिया की ऐसी शख्सियतें जिनके विचारों ने व्यक्ति, समाज, मुल्कों तया कौमों तक में बदलाव के बीज बोये। ऐसे महापुरुषों की वाणी से निकले विचारों को संग्रहित किया गया है, जिनके एक-एक शब्द जीवन की दिशा तय करने में सहायक बने। इस कृति के माध्यम से हमें उक्त विद्वानों के द्वारा उद्भ्यत बहुमूल्य विचारों ते साक्षात्कार होता है। भारतीय संस्कृति के आधार ग्रन्थों के उद्भव तथा उनमें निहित मूल भावों पर एक दृष्टि डालें तो यह स्पष्ट होता है कि वेद भारतीय चिंतन धारा के आदि ग्रंथ है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद इन चारों वेदों में जीव, ब्रह्म, ईश्वर तथा प्रकृति आदि दार्शनिक सिद्धांतों का विवेचन हुआ है, वहीं जीवन में पुरुषार्य चतुष्टय धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष आदि का प्रतिपादन भी मिलता है। वेदों में विहित आचारों के विश्लेषण हेतु स्मृतियों की रचनाएँ हुई, जिसमें व्यक्ति और समाज के सम्बन्धों, सामाजिक मूल्यों तथा सामाजिक व्यवस्था स्थापना के नियमों का प्रतिपादन किया गया। तत्पश्चात उपनिषदों, पुराण, ब्राह्मण आदि ग्रन्थों की रचनाएँ हुई। ब्राह्मण ग्रन्थों में ब्रह्म अर्थात वेद के मंत्रों को व्याख्या यज्ञों के सन्दर्भ में की गई। जबकि अरण्य में लिखे जाने के कारण एक विशिष्ट साहित्य आरण्यक साहित्य कहलाया। भारतीय संस्कृति के दो आधारभूत ग्रंथ हैं रामायण और महाभारत। रामायण यानी राम का अवन अर्थात् घर, जिसमें राम के जीवन के आदि से अंत तक की कथा है, वह रामायण कहलाई। जबकि महाभारत उस महायुद्ध का विराट महाकाव्य है, जिसमें युद्ध के लिए भारत के सभी राजा महाराजा एक स्थान पर सम्मिलित हुए, भारत के एक महायुद्ध के अर्थ में उसका नाम महाभारत कहलाया।

You might also like

Reviews

No Reviews found.