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Chanderkanta

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2025
978-9348409263

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शाम का वक्त है, कुछ-कुछ दिखाई दे रहा है सुनान में एक ही के नीचे दो शख्स वीरेंद्रसिंह और तेजसिंह एक पत्र की हा पर मेरे जपल बातें कर रहे हैं वीरेंद्रसिंह की उम्र इक्कीस या बाईस वर्ष की होगी। वह नौगढ़ के राजा मुंडिसिंह का इकलौता लड़का है। तेजसिंह राजा सुरेंद्रसिंह के दीवान जीतसिंह का प्यारा तड़का और कुंअर वीरेंदसिंह का दिली दोस्त, बड़ा गालाक और फुर्तीला कमर में सिर्फ खंजर बांधे, बगल में बटुआ लटकाये, हाथ में एक कर्मद लिए बड़ी तेजी के गाय गातें दरक देखता और इनसे बातें करता जाता है। इन दोनों के सामने एक थोड़ा कया-कसाया दुरुम्न पेड़ से बंधा हुआ है। कुंअर वीरेंद्रसिंह कह रहे हैं, "भाई तेजसिंह, देखो मुहब्यत भी क्या बुरी बला है जिसने इस दर्जे तक पहुंचा दिया। कई दफे तुम विजयगढ़ से राजकुमारी चंद्रकान्ता की चीठी मेरे पास लाये और मेरी चीठी उन तक पहुंचाई जिससे साफ मालूम होता है कि जितनी मुहब्बत में चंद्रकान्ता से रखता हूं उतनी ही चंद्रकान्ता मुझसे रखती है और हमारे राज्य से उसके राज्य के बीच सिर्फ पांच कोस का फासला ही है, इस पर भी हम लोगों के किये कुछ नहीं बन पड़ता। देखो इस खत में भी चंद्रकान्ता ने यही लिखा है कि जिस तरह बने जल्द मिल जाओ'।" तेजसिंह ने जवाब दिया, "मैं हर तरह से आपको वहां ले जा सकता हूं मगर एक तो आजकल चंद्रकान्ता के पिता महाराज जयसिंह ने महल के चारों तरफ सख्त पहरा बैठा रखा है, दूसरे उनके मंत्री का लड़का क्रूरसिंह उस पर आशिक हो रहा है, ऊपर से उसने अपने दोनों ऐयारों' को जिनका नाम नाजिमअली और अहमदखां है

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