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Chuppiya Jab Badhti Hai To Band Ho Jata Hain Samaj
कई लोगों द्वारा, कई पाठक समाजों द्वारा जब कविता बार-बार पढ़ी जाती है तो उसके कालजयी होने की वात सुनिश्चित होती है। इस अर्थ में केदारनाथ सिंह की कविता कालजयी साबित होती है। उनके जीवन काल में भी तथा आज भी उनकी कविताएँ खूब पढ़ी जा रही हैं और आस्वादित भी हो रही हैं। यह उनकी कविता की निजता है जिसमें पाठक एक खास तरह की आत्मीयता का अनुभव करते हैं। उनका रचना कर्म और उनका पाठक समाज एक विशेष वृत्त में आ जाते हैं जिसके कारण उनकी कविता के प्रति हर कोई पड़ोसी-भाव का अनुभव भी करने लगता है। यह कोई भावुक प्रवृत्ति नहीं है। यह एक गम्भीर प्रवृत्ति है जो बहुत कम कवियों में हम अनुभव कर पाते हैं। यही केदारनाथ सिंह की कविता की निजता है और ताकत भी। शुरू से ही केदारनाथ सिंह अपनी धरती से जुड़े कवि रहे हैं जो सतही मोहवश उनमें विकसित दृष्टि नहीं है। यदि हम उनकी कविता-यात्रा का सूक्ष्मता से निरीक्षण करेंगे तो हम यह देख सकेंगे कि इस जुड़ाव का निरन्तर विकास होता गया है। इस कारण से एक सही मनुष्य उनकी कविता के केन्द्र में सदैव रहा है। उनकी देशजता में, उनकी भारतीयता में तथा उनकी वैश्श्वकता में यह मनुष्यधर्मी बिम्ब हमेशा जीवन्त दिखता है। इसी बिम्ब ने पाठकों के हृदय में आत्मा के पड़ोसी-भाव को विकसित किया है। केदारनाथ सिंह की कविता के अपार शब्द-भण्डार में, उनकी बिम्ब प्रचुरता में, उनकी विशिष्ट रूपक निर्मितियों में तथा उनकी सहज उन्मुखताओं में उनके कवि के साथ एवं उनके मनुष्य के साथ पाठक समाज का तादात्म्य सहजतापूर्वक हो जाता है। केदारनाथ सिंह ने लिखा कि 'अभिव्यक्ति के सारे माध्यम निरस्त या समाप्त हो जाते हैं, शब्द वहाँ भी जीवित रहता है।' यह भी उनका कहना है कि 'विचार, अनुभूति और संवेदना सब का सम्बन्ध शब्द से होता है और कविता शब्द है। शब्द-जो कवि के लिए सबसे रहस्यमय वस्तु है'। 'कविता शब्द है' और 'शब्द जीवित रहता है'
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