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Islam Dharam Ki Rooprekha

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2025
978-81-993107-0-4

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बहुत दिनों से इच्छा थी कि हिन्दुओं-विशेषकर पंडित समुदाय को 'इस्लाम' धर्म का परिचय कराने के लिए एक पुस्तक लिखूँ। संयोग से ऐसा अवसर भी सन् 1922 ई. की जेलयात्रा में हाथ लगा। संस्कृतज्ञ पंडित समुदाय एक तो हिन्दी भाषा की ओर रुचि ही कम रखता है, दूसरे वैसा करने से प्रचार भी अधिक दूर तक होगा; इन्हीं सब विचारों से ग्रन्थ को संस्कृत में लिखना आरम्भ किया। बोड़ा लिखने में बाद मैन उसे अपने नारायण बाबू को तय करके सनाया। इस पर जाकी हिन्दी में मो लिखा जाना चाहिए। तब से इमाम की पोस कका भाग हिन्दी में भी लिखा गया। वार निकालने पर कई महानील सुपवाने की प्रेरणा दी, किन्तु में मजबूर था क्योंकि नगन्य अ लिखा नहीं पंवा चां तथा नहर के एक अन्य कामा के आचक्यत लिए अवसर भी मिलना कठिन था। साभाग्य से एक बार फिर ऐसा बार हाथ लगा और मन इस काम को समाप्त करने में बहुत जान्दी लिया। दखें, अभी सस्कृत इस्लाम एम का रूपरेखा का कब उनी भा के हाथ में जाने का सौभाग्य प्रशात अल्ला है, किन्तु हिन्दी इस्लाम धर्म को सपरखा तो प्रथम हा उसका गात्र हो रहा है। हिन्दू धर्म में जसे अनेक साता उनके सिद्धान्तों में परस्पर भेद है, वैस ही इसनाम की मी गवत्या। इन कतिनाइयों बनेग बले "तुरान' के मूल को उन शब्दों में केवल भारा के परिवलन के लाय 'इलाम धर्म को रखने का प्राचम किया है। यहुत कम जगह गाराम नष्ट करने के लिए कुछ और भी लिखा गया है।

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