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Kedarnath Aggrawal : Punravlokan

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2026
9789349650382

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सन् 1986 में 'केदारनाथ अग्रवाल' संकलन प्रकाशित हुआ था। अपने एक पूर्वप्रकाशित रूप का यह नया अवतरण था। उस वर्ष केदार पचहत्तर के हुए थे और चार महीने पहले, जनवरी में उनकी 'प्रिया प्रियंवद पार्वती' उनका साथ छोड़ गयी थीं। एक तो आइत वालों की नगरी बाँदा, दूसरे केदार की वकालत वाली ज़िन्दगी, तीसरे साहित्यिक मित्रों से दूरी, उसपर जीवनव्यापी संगिनी का विछोह-केदार बहुत टूटे हुए और अकेले थे। तह हुआ कि उन्हें केंद्र में रखकर उनके कर्मस्थल बाँदा में एक आयोजन किया जाय। सितम्बर महीने में 'सम्मानः केदारनाथ अग्रवाल' का आयोजन हुआ। उस अवसर पर उनके एकमात्र प्रकाशक शिवकुमार सहाय ने कहा कि केदार के मूल्यांकन की एक पुस्तक भी प्रकाशित हो तो अच्छा रहेगा। सन् 1964 में श्रीप्रकाश (इलाहाबाद के एक प्रकाशक) के संपादन में एक संकलन निकला था। उसमें कुछ कायदे काम लेख थे लेकिन बाकी सामग्री उपेक्षणीय थी। नए लेख लिखवाए गए और संकलन तैयार हुआ। केदार संसार में संभवतः पत्नीप्रेम के सबसे बड़े कवि हैं। 'हे मेरी तुम' और 'जमुन जल तुम' के रचयिता का एकाकीपन उनके शुभचिंतकों को खलाता था। हम लोग जून महीने की तपती गर्मी में बाँदा गए और तीन दिन उन्हीं के घर पर रहकर उनका साक्षात्कार लेकर लौटे। शिवकुमार सहाय ने उसे 'कवि-मित्रों से दूर' नाम से और मूल्यांकन के संकलन को 'केदारनाथ अग्रवाल' नाम से प्रकाशित किया जिसे अन्य पुस्तकों के साथ सितम्बर में उनके 'सम्मान' कार्यक्रम में रिलीज़ किया गया। लेकिन यह मूल्यांकनपरक संकलन इधर पचीस वर्षों से अनुपलब्ध था। कई कोशिशें हुई लेकिन कुछ नए लेख लिखवाने का काम नहीं हो पा रहा था, इसलिए पुराने लेखों में भी कुछ फेरबदल रुका हुआ था। आखिरकार इधर दो-तीन साल में केदार के प्रति नए लेखकों की रुचि जाग्रत हुई और संकलन ने नया रूप लिया। केदार के कई मित्र उनकी पत्नी के देहांत के बाद उनसे मिलने को उत्सुक थे लेकिन वे बाँदा नहीं जा सकते थे। कुछ तो अपने वार्धक्य के कारण, कुछ अकेले रह जाने से केदार के पास रहने-खाने की असुविधा के कारण। जब कार्यक्रम की

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