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Lafzon Se Banti Duniya
पिछले पाँच दशकों में भारतीय भाषा केंद्र ने शोध के क्षेत्र में अनेक सैद्धान्तिक स्थापनाओं को सुदृढ़ किया है । साहित्य को देखने की दृष्टि का विस्तार यहाँ की विशेषता रही है । वैश्विक समाज के साथ साहित्य में वर्णित विषयों की समझ को विकसित करते हुए, तुलनात्मक अध्ययन की प्रविधि के महत्व को आधार देना, विभिन्न भाषिक परिवेश से आए हुए छात्रों को अपनी संपदा समझना केंद्र की विशेषता रही है । साथ ही समय, परिवेश और परिप्रेक्ष्य पर पैनी नज़र रखते हुए हाशिए, केंद्र और परिधि को समझते हुए अखिल ब्रह्मांड के विमर्श को अपनी सृजनात्मकता में शामिल करना भारतीय भाषा केंद्र की पहचान है । जे–एन–यू– ने यह सिखाया कि विमर्श की स्थापना के माध्यम से सामाजिक जड़ता को तोड़ने में भारतीय भाषा केंद्र जैसे संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है । साहित्य के माध्यम से उदात्त दृष्टि का विकास हो, यह मूल में रहा । भक्तिकाल के विस्तृत फलक को समझ सकना, साहित्य और विचारधारा के प्रश्नों को खोजना, ग्राम्य कविताओं में उसकी देशजता को विस्तृत वितान में देख सकना, केरल या कश्मीर की कवयित्रियों की कविताओं को हिंदी अनुवाद के माध्यम से समझ सकना यहीं संभव है । भारतीय भाषा केंद्र ने भारत की सामासिक संस्कृति के संगुफ़न को हिंदी, उर्दू, उड़िया, तमिल, बंग्ला के साथ अनुवाद की व्यापकता में विस्तृत फलक दिया है । भाषाओं को सीखने–समझने की ललक यहाँ की कक्षाओं की विशेषता रही है ।
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