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Matrabhasha : Sahitya Evam Sanskriti
भाषा मनुष्य की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है जिसका कोई अन्य विकल्प नहीं है। विश्व समाज बहुभाषी है जो सांस्कृतिक विविधताओं को दर्शाता है। जो भाषा व्यक्ति अपनी माँ की गोद में सीखता है उसे ही 'मातृभाषा' कहा जा सकता है जिससे किसी भी व्यक्ति को कभी भी अलग नहीं किया जा सकता है। विश्व के विकास में सामाजिक-राजनीतिक ढाँचों के परिवर्तन के साथ भाषाओं को भी शक्ति संरचनाओं से जोड़ दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि कुछ भाषाएँ शक्ति का प्रतीक हो गईं और कुछ को कमजोर समझा जाने लगा। भारत में अंग्रेजी राज के बाद से भाषाई वर्चस्व ने बहुत तेजी से विस्तार किया। इसके बावजूद लोक भाषाओं में सृजन और चिंतन लगातार जारी रहा, चाहे वह व्यापक दायरे तक नहीं पहुँच पाया हो। स्वतंत्रता के बाद से देश में भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन पर ध्यान दिया गया लेकिन अकादमिक क्षेत्र में इसे भी गहराई से मजबूत करने की आवश्यकता है
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