- New product
Muktibodh Shrestha Rachanayen (2 set vol)
"मुक्तिबोध एक कठिन समय के कठिन कवि हैं। उन्होंने अपने सच को कठिन वैचारिक और भावात्मक संघर्ष से पाया और कविचा में चरितार्थ किया .....मुक्तिबोध की कविताओं का स्थापत्य सिल और सुपरिभाषित नहीं है। एक अर्थ में उनकी कविता कर कोई पूर्वज नहीं है। उन्हें उस समय हिन्दी में जो मॉडल नलभ था उनसे उनका काम नहीं चल सकता था। इसीलिए उन्होंने कष्टपूर्वक एक विलकुल नया स्थापत्य अपने लिए गढ़ा। उत्क्तको कमिवाएँ सांचती-विचारती कविताएँ है।'उत्तर-शती के इस क्रूर समय में, खासकर साहित्ता में तब कभी संघर्षशील, तरंगा तत्यान्चेपी, जुझारू सर्जका लेखकों की बात उठती है, मुझे कबीर.. और कवीर बाढ सीधे निराला और मुक्तिबोध बेसाख्ता पाद आत है। मुक्तिवाध क पाह तो स्पष्ट ही है कि वे स्वातंत्र्योत्तर मोहभंग और जनता के अनकह-अनभूत इर्द को ताउम्र फण्टेसी की मारफत तहरीर करते रहे। मुक्तिबोध (1917-1964) आधुनिक युग के अकेले 'फुल टाइम' लेखक मात्रक रहे हैं जिनके लिए साहित्य ही सबकुछ था। उनके
You might also like
No Reviews found.